शयन-नियम

01-05-2026

शयन-नियम

डॉ. सुशील कुमार शर्मा (अंक: 296, मई प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

शयन समय से हो सदा, हो रजनी जब ढाल। 
संध्या शयन न कीजिए, बिगड़े तन-मन चाल॥
 
वामकुक्षि हितकर कही, आयुर्वेद विधान। 
बायीं करवट शयन से, हृदय बने बलवान॥
 
पूर्व दिशा मस्तक धरो, जागे ज्ञान-सुवास। 
दक्षिण सिर आरोग्य दे, जगे हृदय विश्वास॥
 
उत्तर मस्तक जो धरे, मन का रहे अशांत। 
तन थकान निद्रा घटे, हों विचार भी क्लांत॥
 
शयन नहीं तिरछे बदन, रेखा रहे समान। 
रखी संतुलित देह जो, मिले नींद वरदान॥
 
दीप सिरहाने न रखो, दूरी हो पर्याप्त। 
यंत्र पास जो तुम रखो, निद्रा रहे समाप्त॥
 
शैय्या पर भोजन नहीं, पढ़ो न निद्रा संग। 
शयन कक्ष यदि शांत हो, तन मन रहे मलंग॥
 
बीम तले सोओ नहीं, हृदय न ढाँपो हाथ। 
सहज रहे जो देह तो, शांत रहेगा माथ॥
 
सोने से पहले सदा, सुमिरो मंत्र महान। 
शांत चित्त जो सो रहा, निर्मल तन मन जान॥
 
स्वच्छ संयमित नित शयन, जीवन का आधार। 
पुष्ट नींद से ही सदा, मन में शुद्ध विचार॥

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