कुण्डलिया - डॉ. सुशील कुमार शर्मा - मकर संक्रांति - 002

15-01-2026

कुण्डलिया - डॉ. सुशील कुमार शर्मा - मकर संक्रांति - 002

डॉ. सुशील कुमार शर्मा (अंक: 292, जनवरी द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

1
संगम तट पर स्नान कर, धो लो मन के पाप। 
सूर्य वंदना से मिटें, जीवन के संताप। 
जीवन के संताप, पतंगों का नभ उड़ना। 
हरियाली हर खेत, प्रकृति का जग से जुड़ना। 
गुड़-तिल लड्डू भोग, मकर में सूरज आगम। 
संकल्पों के संग, हुआ ख़ुशियों का संगम। 
2
घर-घर ख़ुशियाँ बाँटते, गुड़ तिल लड्डू गोल। 
मकर संक्रांति जोड़ती, सब रिश्ते अनमोल। 
सब रिश्ते अनमोल, नेह विस्तारित करते। 
नीले नभ में सूर्य, हृदय के तम को हरते। 
हुए मकर के सूर्य, दान पुण्यों का अवसर। 
सबसे उत्तम पर्व, बाँटता ख़ुशियाँ घर-घर

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