वसंत पंचमी पर माँ शारदे की आराधना के दोहे

01-02-2026

वसंत पंचमी पर माँ शारदे की आराधना के दोहे

डॉ. सुशील कुमार शर्मा (अंक: 293, फरवरी प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

वीणा के मधु नाद से, जागे अंतःलोक। 
माँ शारद करुणा मयी, हर लो अज्ञान शोक॥ 
 
हंसवाहिनी मातु तुम, वाणी की आधार। 
अक्षर अक्षर में रचो, बुद्धि विवेक अपार॥ 

पीत वसन में सज रहा, ज्ञान प्रभा का रूप। 
मौन तिमिर में भर गई, बोध सुधा की धूप॥ 
 
श्वेत कमल पर दिव्यतम, निखिल कला की धार। 
माँ तुमसे सँवरें सदा, शब्द अर्थ संसार॥ 
 
मति भ्रम की इस धूल में, सत्य करो संधान। 
माँ शारद प्रस्फुट करो, अंतस का विज्ञान॥ 
 
ग्रंथ हृदय बसते सदा, जिनके उर माँ आप। 
वाणी मर्यादित करो, हर लो सारे पाप॥ 
 
शुभ पूजन अर्पित करूँ, पुष्प धूप फल कंद। 
तुम बिन सूना शारदे, चिंतन का आनंद॥ 
 
हृदय ज्ञान का तेज दो, दो संयम विस्तार। 
शब्दों में उतरें सदा, सत्य सिद्ध आचार॥ 
 
उर वसंत जब जागता, अंतस बहे प्रकाश। 
माँ शारद की कृपा से, जगता मन विश्वास॥ 
 
माँ शारद मन से हरो, अहम, द्वेष के दाग। 
जड़ता के इस काल में, दो चेतन अनुराग॥ 

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