वेलेंटाइन दिवस पर

15-02-2026

वेलेंटाइन दिवस पर

डॉ. सुशील कुमार शर्मा (अंक: 293, फरवरी प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

आज का दिन
केवल गुलाबों का उत्सव नहीं, 
यह उन धड़कनों का पर्व है
जो किसी एक नाम पर
धीरे से ठहर जाती हैं। 
 
प्रिय, 
तुम्हें स्मरण करते ही
मन में एक मधुर आभा फैल जाती है, 
जैसे उषा
रात के कंधों पर
सुनहरी चादर रख दे। 
 
तुम्हारा होना
मेरे दिनों की साधारण लय को
संगीत बना देता है। 
तुम्हारी हँसी
मेरे एकाकी क्षणों में
दीपशिखा की तरह जल उठती है। 
 
प्रेम
केवल आकर्षण का ज्वार नहीं, 
यह वह शांत सरोवर है
जिसमें हम
अपना प्रतिबिंब नहीं
एक दूसरे का विश्वास देखते हैं। 
 
जब तुम्हारा हाथ
मेरे हाथ में आता है
तो लगता है
जग का समस्त असंतुलन
क्षण भर को संतुलित हो गया। 
तुम्हारी दृष्टि
मेरे भीतर छिपे संशयों को
धीरे से पिघला देती है। 
 
आज के इस दिवस पर
मैं तुम्हें शब्द नहीं
अपना संपूर्ण मन अर्पित करता हूँ। 
तुम्हारी थकान का सहचर, 
तुम्हारी मुस्कान का कारण, 
और तुम्हारी मौन व्यथा का
निश्छल श्रोता बनना चाहता हूँ। 
 
यदि प्रेम एक यात्रा है
तो मैं तुम्हारे साथ
हर ऋतु से गुज़रना चाहता हूँ
फूलों के बीच भी
और काँटों की पगडंडी पर भी। 
 
वेलेंटाइन का यह दिवस
हमारे लिए
केवल एक तिथि न रहे, 
यह प्रतिदिन की वह स्मृति बने
कि हम
एक दूसरे के जीवन में
सौम्य प्रकाश बनकर रहें। 
 
तुम्हें मेरा समर्पित प्रणाम
और हृदय भर प्रेम। 

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