दीप

डॉ. सुशील कुमार शर्मा (अंक: 216, नवम्बर प्रथम, 2022 में प्रकाशित)

दीपक ज्योति
शरीर और आत्मा
चेतन सृष्टि। 
 
दीपों का पर्व
आध्यात्मिक उत्कर्ष
मिटे अमर्ष। 
 
दीप मालाएँ
आशाओं की लड़ियाँ
नए संकल्प। 
 
दीप प्रज्ज्वल
नकारात्मक मन
मृदु उज्ज्वल। 
 
नव चिराग़
हर घर ठिठोली
अंतस दीप। 
 
भग्न-हृदय
संवेदन के दीप
तमस छटा। 
 
तिमिरपंथ
मंडित अँधियारे
दीपक हँसे। 

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