गणपति वंदना

15-09-2026

गणपति वंदना

डॉ. सुशील कुमार शर्मा (अंक: 302, सितम्बर द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

हे गजवदन वृकोदर देवा, मंगलमय सुखकारी। 
गौरीसुत तुम विघ्न विनाशक, बुद्धि प्रदाता भारी। 
करुणा कर मेरे घर आओ, हे गणपति सुखकारी। 
शीश नवाऊँ चरण तुम्हारे, जय जय मंगलकारी॥
 
एकदंत जय हे लंबोदर, तुम जग के रखवारे। 
रिद्धि सिद्धि संग आप विराजत, तुम भक्तन के प्यारे। 
दीन जनों की लाज बचाओ, काटो कष्ट हमारे। 
शरण पड़े जो तुम्हरे गणपति, तारो भव के धारे॥
 
मोदक प्रिय मंगल की मूरत, मूषक वाहन धारी। 
लाल सिंदूर सजे तन ऊपर, छवि अति सुंदर प्यारी। 
प्रथम पूज्य तुम देव जगत के, महिमा अपरंपारी। 
नाम तुम्हारा जो नर जपता, मिटती विपदा सारी॥
 
बुद्धि हमारी ऐसी कर दो, सत्य मार्ग अपनाऊँ। 
मन में निर्मल भाव जगाकर, प्रभु चरणों में जाऊँ। 
लोभ मोह मद दूर भगाकर, निर्मल भक्ति पाँऊँ। 
ज्ञान ज्योति हृदय में भर दो, तम अज्ञान मिटाऊँ॥
 
विद्या के तुम अधिपति देवा, कवि को कंठ सँवारो। 
शब्द शब्द में सत्य बसाकर, मेरे भाव निखारो। 
धर्म पथिक लेखन हो मेरा, ऐसी शक्ति पवारो। 
सरस्वती माँ के संग मिल तुम, दीप बुद्धि उजियारो॥
 
जब जीवन में राह न सूझे, तुम दीपक बन जाना। 
जब मन पर संशय छा जाए, तुम विश्वास जगाना। 
दुःख की घोर घंटा घिर आए, आकर धीर बँधाना। 
गणपति जब गिरने को होऊँ, अपना हाथ बढ़ाना॥
 
बालक जैसे सरल हृदय से, तेरी शरण में आया। 
अल्प बुद्धि हूँ प्रभु मैं तेरा, तुमने मुझे बुलाया। 
दोष हमारे क्षमा करो प्रभु, करुणा का जल लाया। 
निर्मल हृदय से जो भजता है, उसने तुमको पाँया। 
 
जय गणपति जय मंगलदाता, जय हो विघ्न विनाशक। 
जय गजवदन दयामय देवा, जय भक्तन के पालक। 
तेरी कृपा रहे जीवन में, बनूँ सदा हित साधक। 
अंत समय भी नाम तुम्हारा, हो अधरों पर नायक॥

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