राष्ट्र निर्माता

15-09-2026

राष्ट्र निर्माता

डॉ. सुशील कुमार शर्मा (अंक: 302, सितम्बर द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

पाँच सितंबर को विद्यालय के सभागार में सजे भव्य मंच से प्रबंधन समिति के अध्यक्ष महोदय ने जब वरिष्ठ शिक्षक माधव जी के गले में गेंदे की भारी माला पहनाई तो पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा। माइक पर बोलते हुए उन्होंने माधव जी को ‘संस्थान की रीढ़’ और ‘सच्चा राष्ट्र निर्माता’ घोषित किया। मंच पर उन्हें स्मृति चिह्न के रूप में काँच का एक चमचमाता ग्लोब और प्रशस्ति पत्र भेंट किया गया।

समारोह के ठीक बाद विद्यालय के प्रशासनिक कक्ष से एक आवश्यक बैठक का बुलावा आ गया। माधव जी गले से माला उतारे बिना ही सीधे निदेशक के कक्ष में पहुँचे जहाँ मेज़ पर फ़ाइलों का अंबार लगा था। निदेशक ने बिना ऊपर देखे एक लंबी सूची उनकी तरफ़ बढ़ा दी।

"माधव जी, इस सत्र में नए प्रवेश का लक्ष्य पूरा नहीं हुआ है। कल से आपको शिक्षण कार्य छोड़कर आसपास की बस्तियों में घर-घर जाकर दाख़िले के पर्चे बाँटने होंगे।"

माधव जी के हाथों में काँच का वह सुंदर ग्लोब टिका था और निदेशक की मेज़ पर उनकी सेवा-शर्तों का वह पत्र जिस पर लिखा था कि पचास नए दाख़िले न लाने की दशा में उनका वेतन रोक दिया जाएगा।

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