आँसू ताक़त हैं कमज़ोरी नहीं

01-05-2026

आँसू ताक़त हैं कमज़ोरी नहीं

डॉ. सुशील कुमार शर्मा (अंक: 296, मई प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

पिता के निधन के बाद आरव महीनों तक हर मिलने वाले के सामने रोता रहा। घर वाले समझाते, मित्र ढाढ़स बँधाते, पर वह अपने दुःख पर क़ाबू नहीं पा रहा था वह दुख को छिपाने की जगह, प्रदर्शित कर रहा था। 

एक दिन उसकी बूढ़ी दादी उसे पिता की पुरानी अलमारी के पास ले गईं। 

उन्होंने एक डायरी निकाली। उसमें पिता ने लिखा था, “यदि मेरे जाने के बाद मेरा बेटा इतना रोए कि जीना भूल जाए, तो उसे समझाना कि किसी के जाने से जीवन कभी रुकता नहीं है, उसे बताना कि आँसू ताक़त हैं कमज़ोरी नहीं,” आरव के हाथ काँप गए। 

दादी बोलीं, “बेटा, शोक प्रेम का प्रमाण है, पर अति शोक जीवन का अपमान।” 

उस दिन आरव बहुत रोया पर अंतिम बार टूटकर। फिर उसने पिता की डायरी सँभाली, व्यापार सँभाला, घर सँभाला। 

लोगों ने देखा, उसकी आँखों में नमी अब भी थी, पर अब उस नमी में दुर्बलता नहीं, गहराई थी।

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