स्वर कोकिला आशा भोंसले को श्रद्धांजलि

15-04-2026

स्वर कोकिला आशा भोंसले को श्रद्धांजलि

डॉ. सुशील कुमार शर्मा (अंक: 295, अप्रैल द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

कुंडलिया छंद 
 

1
आशा जी अब मौन है, थम सा गया विहान। 
राग भरे उस कंठ से, सूना हुआ जहान॥
सूना हुआ जहान, गूँजती यादें गहरी। 
गीतों का आकाश, थमी वह स्वर की लहरी। 
आशा का अवसान, हृदय में भरी हताशा। 
अर्पित श्रद्धा मान, ईश गति ताई आशा॥

2
सुर धारा थम सी गई, रुँधे हृदय के तार। 
मीठे सुर की छाँव अब, छोड़ चली संसार॥
छोड़ चली संसार, अमर उनके स्वर, गाने। 
हर धड़कन में गीत, गूँजते मधुर तराने। 
अर्पित सुमन सुशील, व्यथित है हृदय हमारा। 
आशा भारत रत्न, अमर आशा सुर धारा॥
 

0 टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

सामाजिक आलेख
कविता
कविता-मुक्तक
हास्य-व्यंग्य आलेख-कहानी
दोहे
गीत-नवगीत
सांस्कृतिक आलेख
बाल साहित्य कविता
लघुकथा
साहित्यिक आलेख
स्मृति लेख
कहानी
काम की बात
कविता - हाइकु
ऐतिहासिक
कविता - क्षणिका
चिन्तन
व्यक्ति चित्र
किशोर साहित्य कहानी
सांस्कृतिक कथा
ललित निबन्ध
स्वास्थ्य
खण्डकाव्य
नाटक
रेखाचित्र
काव्य नाटक
यात्रा वृत्तांत
हाइबुन
पुस्तक समीक्षा
हास्य-व्यंग्य कविता
गीतिका
अनूदित कविता
किशोर साहित्य कविता
एकांकी
ग़ज़ल
बाल साहित्य लघुकथा
सिनेमा और साहित्य
किशोर साहित्य नाटक
विडियो
ऑडियो

विशेषांक में