साहित्य साधना का पर्याय: आदरणीय सुमन घई और 'साहित्य कुंज' की त्रिशतकीय यात्रा 

15-07-2026

साहित्य साधना का पर्याय: आदरणीय सुमन घई और 'साहित्य कुंज' की त्रिशतकीय यात्रा 

डॉ. सुशील कुमार शर्मा (अंक: 301, जुलाई द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

चर्चित सम्पादकीय: अंकों के तीन शतक पूर्ण करने पर साहित्य कुञ्ज के प्रेमियों को हार्दिक बधाई!

 

 

साहित्य की दुनिया में कुछ लोग केवल रचनाएँ नहीं लिखते, वे साहित्यिक संस्कारों का निर्माण करते हैं। वे स्वयं दीपक बनकर दूसरों को प्रकाशित करते हैं। आदरणीय सुमन घई जी ऐसे ही विरल साहित्यसेवी हैं, जिन्होंने साहित्य कुंज के माध्यम से तीन सौ अंकों की गौरवपूर्ण यात्रा पूरी कर यह सिद्ध किया है कि साहित्य का सृजन जितना कठिन है, उससे कहीं अधिक कठिन है उसके लिए एक सतत, विश्वसनीय और गरिमामय मंच का निर्माण तथा उसे दशकों तक जीवंत बनाए रखना। 

पत्रिका का संपादन केवल सामग्री संकलित करने का कार्य नहीं हैं। यह साहित्यिक दृष्टि, निष्पक्षता, धैर्य, परिश्रम और पूर्ण समर्पण की तपस्या है। तीन सौ अंकों तक इस तपस्या को उसी ऊर्जा और गरिमा के साथ निभाना सुमन घई जी के व्यक्तित्व की सबसे बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने साहित्य कुंज को केवल एक पत्रिका नहीं रहने दिया, बल्कि उसे विश्वभर के हिंदी रचनाकारों का साझा साहित्यिक परिवार बना दिया। 

विशेष रूप से प्रवासी हिंदी साहित्यकारों और नवोदित लेखकों को मंच प्रदान करने में उनका योगदान अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। अनेक लेखक पहली बार साहित्य कुंज में प्रकाशित होकर व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचे और अपनी पहचान बना सके। यह कार्य केवल संपादकीय कौशल से नहीं, बल्कि साहित्य के प्रति गहरे प्रेम और रचनाकारों के प्रति आत्मीय सम्मान से ही सम्भव होता हैं। 

मुझे भी यह संतोष है कि मेरी अधिकांश रचनाएँ साहित्य कुंज में प्रकाशित हुई हैं। हर बार मेरी रचनाओं को जिस सम्मान, आत्मीयता और साहित्यिक गरिमा के साथ स्थान मिला, उसने मेरे लेखन को नया उत्साह और व्यापक पाठक वर्ग प्रदान किया। एक लेखक के लिए इससे बड़ा सुख और क्या हो सकता हैं कि उसकी रचनाएँ ऐसे मंच पर प्रकाशित हों जिसकी विश्वसनीयता निर्विवाद हो। 

आज जब अनेक पत्र-पत्रिकाएँ आर्थिक और तकनीकी चुनौतियों के कारण अल्पकालिक सिद्ध हो रही हैं, ऐसे समय में साहित्य कुंज का यह त्रिशतकीय पड़ाव साहित्य-जगत के लिए उत्सव का विषय है। यह उपलब्धि सुमन घई जी के अदम्य संकल्प, निरंतर श्रम और साहित्य के प्रति निष्काम समर्पण का जीवंत प्रमाण है। 

ईश्वर से प्रार्थना है कि वे उन्हें उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और सतत सृजनशील ऊर्जा प्रदान करें, ताकि साहित्य कुंज आने वाली पीढ़ियों के लिए भी हिंदी साहित्य का एक विश्वसनीय, प्रेरणादायी और सृजनशील मंच बना रहे। सुमन घई जी की यह साहित्य-यात्रा निस्संदेह हिंदी जगत की अमूल्य धरोहर हैं। 

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