मेरे जाने के बाद

15-04-2026

मेरे जाने के बाद

डॉ. सुशील कुमार शर्मा (अंक: 295, अप्रैल द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

मेरे जाने के बाद
शायद तुम
धीरे से याद करोगे
वे क्षण
जो मुझे समझ न पाने की धूल में
अनदेखे रह गए थे
 
तब तुम्हें दिखेगा
कि मैं उतना कठोर नहीं था
जितना तुमने समझ लिया था
मेरी चुप्पी
दरअसल अहंकार नहीं
अंतर में चलती हुई
एक गहरी साधना थी
मैं बोलता कम था
क्योंकि शब्दों से अधिक
मैं सम्बन्धों को
अनुभव में जीना चाहता था। 
 
मेरे जाने के बाद
शायद तुम्हें याद आए
कि मैंने कभी
तुमसे कुछ माँगा नहीं
न समय
न स्वीकृति
न ही अपने लिए
कोई विशेष स्थान
मैं बस
इतना चाहता रहा
कि मेरे कारण
किसी की आँख न भीगे
मेरे किसी व्यवहार से
किसी का मन न टूटे। 
 
पर विडंबना देखो
मेरे मौन को
तुमने दूरी समझ लिया
मेरे संयम को
घमंड का नाम दे दिया गया
जो भीतर था
वह कभी
बाहर आ ही नहीं पाया
और जो बाहर दिखा
वह मेरा सत्य था ही नहीं। 
 
मेरे जाने के बाद
तुम्हें याद आएगा
वह हल्का सा मुस्कुराना
जब तुम क्रोधित थे
और मैं
तुम्हारी बातों को
बिना प्रतिकार सुना करता था
तुम्हें दिखेगा
कि जिन पलों में
तुमने मुझे अकेला छोड़ा
मैंने उन्हीं पलों में
तुम्हारे लिए शुभ ही सोचा
 
तुम्हें यह भी स्मरण होगा
कि जब मैं आगे बढ़ा
तो तुम्हारी आँखों में
प्रशंसा नहीं
एक अनकहा संकोच था
और कुछ चेहरों पर
ईर्ष्या की हल्की छाया
वे भी
जो मेरे सबसे निकट थे
मेरी उड़ान से
अस्वस्थ हो उठे थे
जैसे मेरी सफलता
उनके अपने अस्तित्व पर
कोई प्रश्नचिह्न हो। 
 
मैं फिर भी
उन सबके बीच
अपना सहज भाव बनाए रहा
क्योंकि मैंने सीखा था
कि दूसरों की दृष्टि
हमारे सत्य का मापदंड नहीं होती
मेरे जाने के बाद
शायद तुम समझ पाओगे
कि मैं दूर नहीं था
बस थोड़ा भीतर था। 
 
मेरे पास
बहुत कुछ था कहने को
पर मैंने चुना
सुनना
और सहना
आज
जब मैं नहीं हूँ
तो मेरी अनुपस्थिति
शायद तुम्हें
मेरी उपस्थिति से अधिक
महसूस होगी। 
 
तुम खोजोगे मुझे
उन अधूरे वाक्यों में
उन ख़ामोश शामों में
और उन पलों में
जहाँ मैं
बिना कुछ कहे
तुम्हारे साथ था। 
 
यदि कभी
तुम्हारी आँखें नम हो जाएँ
तो समझ लेना
वह मेरे लिए नहीं
उस सत्य के लिए है
जिसे तुमने
बहुत देर से पहचाना। 
 
मैं गया नहीं हूँ
बस तुम्हारी स्मृतियों में
धीरे से उतर गया हूँ। 
 
जहाँ अब
न कोई शिकायत है
न कोई अपेक्षा। 
 
केवल एक शांत संदेश है
कि किसी को समझने में
इतनी देर मत करना
कि वह
समझाने के लिए
शेष ही न बचे।
 

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