मधुमास वसंत पर दोहे

01-02-2026

मधुमास वसंत पर दोहे

डॉ. सुशील कुमार शर्मा (अंक: 293, फरवरी प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

आया नव मधुमास फिर, 
चूनर बनी पतंग। 
कण कण में मुस्कान है, 
बिखरे धानी रंग। 
 
कोयल बोले आम पर, 
भौंरे गुनगुन गान। 
मधु वसंत ने लिख दिया
अंतस प्रेम विधान। 
 
सरसों हँसती खेत में, 
पीत बसंती साज।
धरती जैसे दुलहन बनी, 
गया शिशिर का राज। 
 
मंद पवन जब छेड़ दे, 
पत्तों का संगीत। 
मन भी तब गाने लगे, 
मधु वसंत की प्रीत। 
 
फूलों में मधु भर गया, 
भरी सुवास अपार। 
नव वसंत सिखला गया, 
कैसे हो शृंगार। 
 
नील गगन मुस्कान में, 
धूप हुई अनमोल। 
हृदय कमल में खिल उठे, 
नव आशा के बोल। 
 
रंगों में लिपटी धरा, 
चहके उपवन बाग़। 
मधु वसंत ने सीख दी, 
जीवन ख़ुशियाँ राग। 
 
शिशिर गया संकोच ले, 
आया मन मधु मास। 
टूटी हर जड़ता यहाँ, 
जागा मन विश्वास। 
 
कलियों ने मुस्कान से, 
खोले बंद किवाड़। 
मधु वसंत ने तोड़ दी, 
मन ठिठुरन की बाड़। 
 
ख़ुशियाँ जीवन में भरे, 
वह है सच्चा तंत्र। 
मन वसंत मधुमास ही
है जीवन का मंत्र। 

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