घाव का उपहार

01-05-2026

घाव का उपहार

डॉ. सुशील कुमार शर्मा (अंक: 296, मई प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

मुख में मधु की धार लेकर जो मिलें
ध्यान रखना
वे हृदय में दाह का संसार देंगे।
 
जब तलक तुम सीढ़ियों पर चढ़ रहे हो।
वे तुम्हारे स्वप्न को आकार देंगे।
जिस घड़ी तुम शिखर पर आरूढ़ होगे।
पीठ पीछे वज्र जैसे वार देंगे।
 
जिन दियों से रोशनी लेते रहे हैं
ध्यान रखना
वे उन्हें ही फूँक का प्रतिकार देंगे।

रंग बदलने में गिरगिटों से तेज़ ये हैं
कुछ पलों में रूप अपना मोड़ लेंगे।
प्यास अपनी जिस घड़े से ये बुझाते
बाद में उस घड़े को फोड़ देंगे। 
 
मुस्करा कर हार जो पहना रहे हो
ध्यान रखना
पीठ पीछे शत्रुता का वार देंगे।
 
जिन्हें तुमने दिया है सहारा आज तक
वे तुम्हारे पंख ही कटवाएँगे।
तुम लगाओगे हृदय से जो निरंतर।
वे तुम्हें पत्थर समझ ठुकराएँगे।
 
प्रीति की प्रतिमा जिन्हें सौंपे खड़े हो
ध्यान रखना
वे तुम्हें बस दुःख का आधार देंगे।
 
स्वार्थ जिनका धर्म है,संबंध झूठे
द्वेष उनके चेहरे पर लिखा है।
हैं हृदय में शत्रुता के भाव उनके
वेश चाहे मित्रता जैसा दिखा है।
 
इसलिए जो हाथ थामे चल रहे हो
ध्यान रखना
वे तुम्हें बस पीर की मनुहार देंगे।
 
मित्रता में भाव हो तो ठीक, लेकिन
मूल्य उसका परखना ठान लेना।
हर चमकती धातु को कुंदन न समझो
नेह देने से प्रथम मन जान लेना।
 
जिन्हें अंतस का सिंहासन दे रहे हो
ध्यान रखना
वे तुम्हें बस घाव का उपहार देंगे।

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