2025 की विदाई एक आत्मवलोकन

01-01-2026

2025 की विदाई एक आत्मवलोकन

डॉ. सुशील कुमार शर्मा (अंक: 291, जनवरी प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

कल
एक नया वर्ष
द्वार पर दस्तक देगा
और आज
2025
धीरे से
अपने पाँव समेट रहा है। 
 
यह वर्ष
सिर्फ़ कैलेंडर का पन्ना नहीं था
यह
हमारी थकान था
हमारी उम्मीद था
हमारे धैर्य की परीक्षा था
और
हमारी चुप सफलताओं का 
साक्षी भी। 
 
इस वर्ष
हमने बहुत कुछ पाया
और
बहुत कुछ
खोया
कुछ लोग
जो साथ चलने का वादा कर गए थे
कुछ सपने
जो पूरे होने से पहले ही
नींद से बाहर आ गए। 
 
इस वर्ष
हम हँसे भी
पर हँसी के पीछे
कभी न दिखने वाली
एक उदासी भी थी
हम मज़बूत बने
क्योंकि
टूटने का विकल्प
हमने अपने लिए छोड़ा ही नहीं। 
 
2025
तुमने हमें सिखाया
कि
हर प्रश्न का उत्तर
तुरंत नहीं मिलता
और
हर पीड़ा का अर्थ
समय ही समझाता है
 
तुमने दिखाया
कि
कुछ रिश्ते
बिना शोर के
दूर चले जाते हैं
और
कुछ अजनबी
अचानक
अपने से हो जाते हैं। 
 
आज
तुम्हारी विदाई पर
न कोई शिकायत है
न कोई शिकायतों की सूची
बस
एक शांत स्वीकार है
कि
जो हुआ
उससे हम
कुछ अधिक मनुष्य बने। 
 
कल
2026 आएगा
नई रोशनी
नए संकल्प
नए भ्रम लेकर
पर
हम उसके सामने
आज से अधिक सजग
और
थोड़ा अधिक कोमल होकर खड़े होंगे। 
 
2025
तुम जाओ
तुम्हारे साथ
हम अपनी कड़वाहटें
और अनावश्यक बोझ भी
जाने दे रहे हैं
पर
तुम्हारे दिए सबक़
हम अपने भीतर
सँभाल कर रखेंगे
 
क्योंकि
वर्ष बदलते हैं
पर
जो भीतर बदल जाए
वही
वास्तविक नव वर्ष होता है। 

0 टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

कविता
गीत-नवगीत
लघुकथा
सांस्कृतिक आलेख
बाल साहित्य कविता
स्मृति लेख
दोहे
कहानी
कविता-मुक्तक
साहित्यिक आलेख
काम की बात
सामाजिक आलेख
कविता - हाइकु
ऐतिहासिक
कविता - क्षणिका
चिन्तन
व्यक्ति चित्र
किशोर साहित्य कहानी
सांस्कृतिक कथा
हास्य-व्यंग्य आलेख-कहानी
ललित निबन्ध
स्वास्थ्य
खण्डकाव्य
नाटक
रेखाचित्र
काव्य नाटक
यात्रा वृत्तांत
हाइबुन
पुस्तक समीक्षा
हास्य-व्यंग्य कविता
गीतिका
अनूदित कविता
किशोर साहित्य कविता
एकांकी
ग़ज़ल
बाल साहित्य लघुकथा
सिनेमा और साहित्य
किशोर साहित्य नाटक
विडियो
ऑडियो

विशेषांक में