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    इक्कीसवीं सदी की कहानियाँ
    इक्कीसवीं सदी की कहानियाँ आवरण चित्र: श्रेया श्रुति   साहित्य कुञ्ज के ‘इक्कीसवीं सदी की कहानियाँ’.. आगे पढ़ें
उसका क्या
कवि, स्वर, चित्र और निर्माण: अमिताभ वर्मा - उसका क्या

साहित्य कुञ्ज के इस अंक में

कहानियाँ

अभियोग 

  समीप के ही एक शहर में मेरे पति के एक सहकर्मी के बेटे की शादी थी। वहाँ से देर रात गये लौटना हुआ। घर में घुसते ही साथ वाले घर से हमारी इंग्लिश पड़ोसिन जैनी व उसकी पन्द्रह वर्षीय आगे पढ़ें


आगंतुक

  यह बरसात भी अभी आई नहीं थी। वर्षा ऋतु से पहले की बारिश। रात के नौ बज गए थे। दुकान बंद करने का समय था। इक्का-दुक्का बूँदें टपकने लगी थीं। आँधी कुछ देर पहले ही शांत हुई थी। मोहन आगे पढ़ें


कुंती का खेल

  कुंती को वह खेल अकस्मात्‌ ही सूझा था। टंडन मेम साहब उस समय अपने ग्राहकों के साथ गोल कमरे बनाम अपनी आर्ट गैलेरी में रहीं और कुंती गोल कमरे के उपकक्ष में। दिन में दीर्घावधि के लिए जब भी आगे पढ़ें


कुशल शिल्पी

    मोहन के पिता एक शिल्पकार थे। वह पत्थरों को सुंदर ढंग से तराशकर मूर्तियाँ बनाते थे। उनकी छैनी इतनी कुशलता से चलती कि कठोर पत्थर में भी सुंदर आकृतियाँ उभर आतीं। मोहन बहुत शरारती और नटखट था, लेकिन आगे पढ़ें


जब ऋतुएँ रूठने लगीं

  एक समय की बात है। धरती पर एक बहुत ही ख़ुशहाल और सुंदर देश था। वहाँ सभी ऋतुएँ समयानुसार बारी-बारी से आती थीं और सभी प्राणियों के जीवन को ख़ुशियों से भर देती थीं। वर्षा उतनी ही होती थी, आगे पढ़ें


दूसरा मौक़ा

  परिवार न्यायालय के बाहर लगी लंबी बेंच पर शिखा चुपचाप बैठी थी। उसके हाथों में तलाक़ के काग़ज़ थे। उँगलियाँ उन काग़ज़ों को पकड़े हुए थीं, लेकिन मन कहीं वर्षों पीछे भटक रहा था। सामने कुछ दूरी पर सौरभ आगे पढ़ें


नोना बेबी ‘पोपोव’

  जैसे ही कार घर के गेट के भीतर दाख़िल हुई, उसकी झलक देखते ही मेरा चेहरा खिल उठा। मैं अमेरिका से लौटी थी पाँच महीने पश्चात्। वहाँ बेटे के घर पहली संतान हुई थी। कार का पिछला गेट खुलते आगे पढ़ें


पिता का श्राद्ध

  मैं एक सेमिनार का हिस्सा बनने के लिए पुणे से दिल्ली की ट्रेन में अपनी आरक्षित सीट पर बैठने जा रही थी कि पीछे से आवाज़ आई, “मैडम यह मेरी सीट है आप अपनी सीट का नंबर एक बार आगे पढ़ें


पिता बरगद की छाया

  पिता के जाने के बाद घर में सबसे अधिक जो चीज़ ग़ायब हुई, वह उनकी चारपाई नहीं थी, उनका पुराना चश्मा नहीं था और न ही दीवार पर टँगी उनकी घड़ी। ग़ायब हुआ था—घर का पता। मुझे यह बात आगे पढ़ें


राई-भर मरहम

  बिजली की तार बेचने वाली अपनी दुकान की सीढ़ियों पर उस छोटे बच्चे को देख कर पहले तो मैं हैरान हुआ। मेरी दुकान पर उसका क्या काम हो सकता था? फिर जैसे ही उसने तिरछी नज़र से पीछे मुड़कर आगे पढ़ें


रोबोट की हत्या

  सुबह की चाय पीते हुए आर्यन अख़बार पढ़ रहा था। अचानक उसकी नज़र एक अजीब-सी ख़बर पर पड़ी, “अत्यधिक काम के बोझ से परेशान रोबोट ने आत्महत्या की!”  वह चौंक गया। भला एक मशीन भी आत्महत्या कर सकती है? आगे पढ़ें


सन्‌ 1931 में . . .

  [मेरी मौसी की क़लम से उनकी यह बीती सुनिए]  असली मेरी जाई कटखनी थीं। बदनसीब थीं। बावली थीं। यह मैंने अपने परिवार में हुए एक बवाल के बीच जाना। वह ऊपर वाली मंज़िल पर रहती थीं और उन्हें पागलपन आगे पढ़ें


हास्य/व्यंग्य

कूल प्रभु कूल

  मैं पराँठों और डाँटों का बहुत शौक़ीन हूँ। जब तक बीवी से डाँट न मिले, जीने का मज़ा ही नहीं आता। इसी तरह मुझे चाहे छप्पन भोग खिला दीजिए, पर जब तक मुँह में आधा-पौन पराँठा न जाए, लगता आगे पढ़ें


कॉकरोच कचवाटिया को ज़ोरदार थप्पड़

  “इस तरह तो मेरा राजनीतिक जीवन शुरू होने से पहले ही ख़त्म हो जाएगा।” कॉकरोच कचवाटिया चिंता में था। लेटर बम का इस्तेमाल करके महाराजा सिंह समर्थक, भक्त शिरोमणि कार्यकर्ता भेड़ाभाई भाडफूसिया ने कॉकरोचों को डरा दिया था, इसलिए आगे पढ़ें


तू अनंत, तेरी कथा अनंता

  “नज़र का तीर जिगर में लगे तो अच्छी बात होती है,  घर की बात घर में ही रहे तो अच्छी बात होती है।” उस्ताद शायर मरहूम जिगर मुरादाबादी ने जब ये मशहूर शेर कहा था तब उन्हें गुमान भी आगे पढ़ें


नक़ली नगरपालिका . . . ख़याल अच्छा है

  “सर, मुझे बहुत बढ़िया आइडिया मिला है। हमारे यहाँ शहरों के प्रशासन का बेड़ा पार हो जाए ऐसा उपाय है,” सचिव ने मंत्रीजी को ख़ुशख़बरी दी।  “वाह, यह आइडिया कहाँ से मिला? किसी फ़िल्म से या सोशल मीडिया से? आगे पढ़ें


नेताजी का संकल्प: ख़ुद को बेचूँगा और उस से भी विकास करवाऊँगा

  कुछ सांसद बिक गए होने की जानकारी मिलने पर संशयात्मा ऐसे ही एक नेताजी से मिलने पहुँचा। संशयात्मा ने कहा, “सुना हैं कि आप बिक गए हैं?” “आपको मुझसे सवाल पूछने के बजाय मुझे बधाई देनी चाहिए कि वाह आगे पढ़ें


बाप बनकर देखिए

  आपको लगता हैं कि दुनियाँ में सिर्फ़ एक बाप परेशान हैं। आप ग़लतफ़हमी में जी रहे हैं। नहीं, साहब, जब से यह मोबाइल आया हैं, हम बापों की टेंशन कुछ ज़्यादा ही बढ़ गई हैं। उम्र-दराज़ होने को हैं, आगे पढ़ें


भौंक से भारत दर्शन

  अभी एक कार्य से सूरत जाना हुआ। वहाँ के कुत्तों की सूरत और सीरत ने मन मोह लिया। सुबह-सुबह भूखे होने पर भी न आपस में लड़ते, न इंसानों से उलझते। शान्ति और सहअस्तित्व में यक़ीन रखने वाला शांत आगे पढ़ें


योर एक्सीलेंसी . . .

  “सर उन्होंने हम पर 50 परसेंट टैरिफ लगा दिया। क्या कहना हैं आपका?”  “लगाने दो। हम देने के क़ाबिल हैंं इसीलिए लगाया। हम विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था हैंं।”  “सर उन्होंने हमारे नागरिकों को हथकड़ियों और बेड़ियों में भेजा।”  “हाँ आगे पढ़ें


आलेख

अफ़्रीका और दास व्यापार

अफ़्रीका और दास व्यापार

  प्रस्तुत लेख में ‘दास’ का अर्थ तथा अफ़्रीका में दास व्यापार कब शुरू हुाआ और यूरोपीय शक्तियों की दास व्यापार में क्या भूमिका थी? उससे किसको क्या लाभ हुआ? इस पर विचार किया गया है। इस लेख को लिखने आगे पढ़ें


कहा मैंने मुख से, किया आपने “हाँ जी, हाँ जी”—भला पिता जी, आपका उपकार कैसे भूलूँ? 

21 जून: फ़ादर्स डे   उम्र चाहे कितनी भी हो जाए, जब मुश्किलों का पहाड़ सामने खड़ा हो, तब दिल से एक ही आवाज़ निकलती है, “पापा हैं न।”  क्या आप कभी नाटक देखने गए हैं? नाटक में मंच पर आगे पढ़ें


डॉ. ज़ियाउर रहमान जाफ़री: ग़ज़लधर्मिता और आलोचना-कर्म

हिन्दी ग़ज़ल ने पिछले कुछ दशकों में जिस तेज़ी से अपनी ज़मीन मज़बूत की है, वह अकल्पनीय है। निःसंदेह इसमें ग़ज़ल के कई प्रतिबद्ध नाम शामिल हैं, जिन्होंने इसे जनमानस तक पहुँचाने का अथक प्रयास किया है। उन्हीं नामों में आगे पढ़ें


तुम्हारा शेष रहना

  “जब तुम मेरे पास से चली जाती हो, तो तुम्हारा जाना पूरी तरह जाना नहीं होता। तुम्हारी भौतिक अनुपस्थिति के बाद भी मेरे एकांत में जो तुम्हारा स्पर्श, तुम्हारी गूँज और तुम्हारा अहसास ठहरा रह जाता है, वही मेरे आगे पढ़ें


बुनियादी मानवीय मूल्यों से समाज का प्रबोधन करने वाले कबीर

  जैसे-जैसे आर्थिक विकास के साथ प्रतिस्पर्धी समाज और अर्थकारण आते जा रहे हैं, वैसे-वैसे मानव सम्बन्ध, जो स्वाभाविक रूप से समरूप और सहयोगात्मक होने चाहिएँ थे, उनमें प्रतिस्पर्धा के कारण तनाव आता जा रहा है। पति-पत्नी, भाई-भाई, सहकर्मी परस्पर आगे पढ़ें


मदर्स डे

  मातृत्व, स्मृति और संस्कृति: एक संस्मरणात्मक निबंध   आज सुबह जब मदर्स डे पर बच्चों ने अपना स्नेह व्यक्त किया तो तन‑मन ऊर्जा से भर उठा। अक्सर मैं यह सोचती थी कि मदर्स डे, फ़ादर्स डे पश्चिमी सभ्यता की आगे पढ़ें


समीक्षा

गंगा में तैरते मिट्टी के दीये: एक अवलोकन

गंगा में तैरते मिट्टी के दीये: एक अवलोकन

समीक्षित पुस्तक: पुस्तक: गंगा में तैरते मिट्टी के दीये काव्य संग्रह हाइकु, ताँका, सेदोका संकलन लेखक: डॉ. रमा द्विवेदी प्रकाशक: शब्दांकुर प्रकाशन पृष्ठ संख्या: १३८ मूल्य ₹300  उपलब्धता: गंगा में तैरते मिट्टी के दीये (amazon.in)   साहित्य की उत्स भूमि आगे पढ़ें


तखत की ताकत

तखत की ताकत

एक मशहूर आलोचक का कहना है, जैसे कहानी को उपन्यास का छोटा स्वरूप नहीं कह सकते उसी तरह लघुकथा को कहानी का छोटा अंश नहीं माना जा सकता है। कहानी कहानी है और लघुकथा लघुकथा। अगर कहानी शोला है तो आगे पढ़ें


यथार्थ की ज़मीन पर रागात्मकता का वितान: ‘सारे गीत तुम्हारे'

यथार्थ की ज़मीन पर रागात्मकता का वितान: ‘सारे गीत तुम्हारे'

कृति: सारे गीत तुम्हारे (गीत-संग्रह)  कृतिकार: सौरभ शुक्ल  प्रकाशक: प्रांजल पब्लिकेशन्स, लखनऊ  मूल्य: ₹200.00 सौरभ शुक्ल का प्रथम गीत-संग्रह ‘सारे गीत तुम्हारे’ समकालीन हिंदी गीत-परंपरा में एक ऐसी ताज़ी और जीवंत बयार की तरह आता है, जो पाठक को कोरे कल्पनाविलास की दुनिया आगे पढ़ें


संस्मरण

कर्मयोगी श्याम त्रिपाठी जी की अनवरत साधना हमारे लिए प्रेरणा है

कर्मयोगी श्याम त्रिपाठी जी की अनवरत साधना हमारे लिए प्रेरणा है

मृत्यु का सन्नाटा उन लोगों के लिए अधिक होता है जो पीछे रह जाते हैं। लोग कहते हैं कि कह देने से दुख हल्का हो जाता है। दुख कोई भारी गठरी नहीं कि किसी से बाँट कर हल्की की जा आगे पढ़ें


जीवित होने का प्रमाण

 (व्यंग्यात्मक संस्मरण)  पिछले दिनों मुझे जीवन का सबसे बड़ा दार्शनिक सत्य पता चला मनुष्य के जीवित होने और सरकारी काग़ज़ों में जीवित होने में उतना ही अंतर है जितना धरती और आसमान के बीच होता है। घटना मामूली थी, लेकिन आगे पढ़ें


मेरी प्रिय मित्र शैल जी: एक संस्मरण 

मेरी प्रिय मित्र शैल जी: एक संस्मरण 

अभी भी विश्वास नहीं आता है कि शैल जी हमें छोड़कर चली गई हैं। मेरा और उनका साथ बहुत पुराना है, 43 वर्ष पुराना। वे मेरे निकट के मित्रों में से थीं। मेरी लेखनी ‘हैं’ के स्थान पर ‘थीं’ के आगे पढ़ें


नाटक

वृहत्त नाटक—विवेकानंद: एक योद्धा संन्यासी के अंक के अंतिम (कुछ दृश्य) अंश

दृश्य 50   स्वामीजी और संन्यासी साथी गुरुदेव का जयकारा कर रहे हैं। सब बड़े प्रसन्न हैं। स्वामीजी कंधे पर रामकृष्ण परमहंस अस्थि कलश उठाए प्रसन्न भाव से बढ़े जा रहे हैं।   स्वामीजी: (चलते-चलते, साथियों से) 9 दिसंबर, 1898। आगे पढ़ें


कविताएँ

शायरी

समाचार

साहित्य जगत - विदेश

विश्व हिंदी दिवस कार्यक्रम

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11 Jan, 2026

“मातृभाषा हमारे जीवन का आधार है, हिंदी के विकास में योगदान देनेवाले ग़ैर हिंदी भाषिक विद्वानों ने अपनी मातृभाषा का…

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ब्रिटेन की डॉ. वंदना मुकेश को मध्य प्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा राष्ट्रीय निर्मल वर्मा सम्मान 2025 

ब्रिटेन की डॉ. वंदना मुकेश को मध्य प्रदेश शासन, संस्कृति विभाग..

9 Oct, 2025

  मध्य प्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा प्रतिवर्ष राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिन्दी को समृद्ध करने वाले विद्वानों को…

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यॉर्क, यूके में भारतीय प्रवासी समुदाय का ऐतिहासिक काव्य समारोह

यॉर्क, यूके में भारतीय प्रवासी समुदाय का ऐतिहासिक काव्य समारोह

16 May, 2025

  दिनांक: 26 अप्रैल 2025 स्थान: यॉर्क, यूनाइटेड किंगडम 26 अप्रैल 2025 को यॉर्क इंडियन कल्चरल एसोसिएशन के तत्वावधान में…

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साहित्य जगत - भारत

व्यंग्य की धार और सामाजिक सरोकारों से सजी भोजपाल साहित्य संस्थान की मासिक गोष्ठी

व्यंग्य की धार और सामाजिक सरोकारों से सजी भोजपाल साहित्य..

28 May, 2026

  भोपाल।  भोजपाल साहित्य संस्थान के अंतर्गत संचालित ‘व्यंग्य भोजपाल’ की मासिक व्यंग्य गोष्ठी का आयोजन 10 मई को भोपाल…

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डॉ. रमा द्विवेदी कृत ‘गंगा में तैरते मिट्टी के दीये’ काव्य संग्रह लोकार्पित 

डॉ. रमा द्विवेदी कृत ‘गंगा में तैरते मिट्टी के दीये’ काव्य..

11 Mar, 2026

  युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच (पंजीकृत न्यास) आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना राज्य शाखा एवं केंद्रीय हिंदी संस्थान के संयुक्त तत्वावधान…

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डॉ. अमित धर्मसिंह के ग़ज़ल संग्रह ‘बग़ैर मक़्ता’ का हुआ लोकार्पण

डॉ. अमित धर्मसिंह के ग़ज़ल संग्रह ‘बग़ैर मक़्ता’ का हुआ..

22 Jan, 2026

  दिल्ली। 20 दिसंबर, 2025 को आयोजित हुई नव दलित लेखक संघ की मासिक गोष्ठी में डॉ. अमित धर्मसिंह के…

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साहित्य जगत - भारत

डाॅ. लक्ष्मी शंकर वाजपेयी के कविता संग्रह ‘कवि के मन से’ का लोकार्पण समारोह 

डाॅ. लक्ष्मी शंकर वाजपेयी के कविता संग्रह ‘कवि के मन से’ का..

27 May, 2026

  दिनांक 30 अप्रैल 2026 को साहित्य अकादमी, नई दिल्ली के सभागार में विख्यात कवि लक्ष्मी शंकर वाजपेयी के कविता…

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मुकेश कुमार ऋषि वर्मा की कृति ‘उगता सूर्य’ का हुआ विमोचन 

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा की कृति ‘उगता सूर्य’ का हुआ विमोचन 

22 Jan, 2026

शाहगंज (आगरा)। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ने श्री चित्रगुप्त भगवान संस्था सभागार में अपना 56वाॅं प्रांतीय अधिवेशन व शैक्षिक…

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डॉ. देवेंद्र शर्मा का काव्य संग्रह ‘अनुभव के आखर’ लोकार्पित

डॉ. देवेंद्र शर्मा का काव्य संग्रह ‘अनुभव के आखर’ लोकार्पित

6 Jan, 2026

  हैदराबाद, 15 दिसंबर, 2025—  अपने दौर के अंतरराष्ट्रीय स्तर के वनस्पति शास्त्र वैज्ञानिक व कवि स्व. डॉ. देवेंद्र शर्मा…

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