संपादकीय - प्रमाणित इतिहास पर आधारित साहित्य की क्या शक्ति है?
साहित्य कुञ्ज के इस अंक में
कहानियाँ
अंधे की लाठी
प्यारे बच्चो, आइये, आज हम आपको एक बड़ी प्रेरक कहानी सुनाते हैं। एक गाँव में दो मित्र रहते थे, नैनसुख और सूरदास। दोनों में बचपन से गहरा प्यार था। प्रतिदिन दोनों शहर में भिक्षाटन करने जाते। राह चलते समय आगे पढ़ें
ऑपरेशन (प्यार का)
“सुनो . . .” शिवम ने कहा। “हाँ?” सुहानी ने जवाब दिया। “मैं अभी निकल रहा हूँ,” शिवम ने कुर्सी पर बैठते हुए एक मोज़ा पहना। “ठीक है, मेरी तो आज छुट्टी है।” “बाय, बाय, बाय . . आगे पढ़ें
कुछ याद रहा कुछ भूल गए
मैं आज बहुत परेशान था दो-तीन घंटे से अपने दादाजी को पास पड़ोस और सड़कों पर ढूँढ़ रहा था। ना जाने कहाँ चले गए। पड़ोस में भी पूछा कि किसी ने दादाजी को देखा तो किसी ने कोई जवाब आगे पढ़ें
गृहलक्ष्मी
उस घर में आज की सुबह पहले जैसी नज़र नहीं आ रही थी। कल तक पचपन वर्षीया जानकी जी सुबह छह बजे उठकर परिवार के लिए चाय बनाती थी। सात बजे उनकी उन्नीस वर्षीया बेटी ऊर्मि उनके साथ किचन आगे पढ़ें
त्रिकाल: जन्मों के पार एक अनुराग
(यह कहानी एक वास्तविक घटना पर आधारित है, यह कहानी स्वर्णलता के जीवन के रहस्यों, उनकी आंतरिक उथल-पुथल और वैज्ञानिक अन्वेषण की गहराई को उजागर करती है) भोपाल की कोचर कॉलोनी के एक साधारण से घर में बैठी स्वर्णलता जब आगे पढ़ें
पप्पू का गप्पू
एक था लड़का, जिसका नाम था पप्पू। पप्पू वैसे तो चतुर और चालाक था, लेकिन बहुत बड़ा गप्पी था। बात-बात पर बढ़ा-चढ़ाकर बातें करना उसकी आदत थी। जहाँ भी मौक़ा मिलता, वह गप्पें मारकर ख़ुद को बहुत होशियार समझता आगे पढ़ें
प्रेम का प्रतिकार
घर में प्रवेश करते ही नंदिनी बिना इधर-उधर देखे दौड़ती हुई अपने कमरे में गई और बैग टेबल पर फेंककर कटे हुए वृक्ष की तरह बिस्तर पर गिर पड़ी। उसके मन में जैसे तूफ़ान उठा हुआ था। उसने पहले आगे पढ़ें
यादों की लालटेन
आज जब रात होते ही घरों की दीवारें रंगीन रोशनी से जगमगाने लगती हैं, बच्चे मोबाइल की चमकती स्क्रीन पर उँगलियाँ फेरते हुए नींद में चले जाते हैं और कहानियाँ किताबों से अधिक इंटरनेट पर खोजी जाती हैं, तब आगे पढ़ें
ये तेरा घर ये मेरा घर
मई की वह दुपहरी तप रही थी, पर भोपाल के पुराने इलाक़े में स्थित पितृ-छाया बँगले के भीतर का वातावरण बाहर की लू से कहीं अधिक सर्द और भारी था। घर के बीचों-बीच बने बड़े से दीवान पर पंडित आगे पढ़ें
विरासत नहीं, प्यार में हिस्सा दो
“मम्मी, आप बड़े भैया को छोड़ दीजिए। आप मेरे साथ चलिए। केयरटेकर रख लेंगे और हम भी साथ रहेंगे, तो आपको किसी बात की चिंता नहीं रहेगी।” “ठीक है बेटा, लेकिन दो दिन बाद विकास और वंदन के आगे पढ़ें
व्यवहारिक ज्ञान
सौम्या चौंक गई थी जब उसकी ननद ने अपनी बेटी रूपा से कहा, “एक काम करो, ये जो मामी ने तुम्हारे लिए झुमका दिया है, उसे यहीं रख देना, ससुराल ले जाने की ज़रूरत नहीं है। वहाँ तुम्हारी सास आगे पढ़ें
सत्य जो किंवदंती बन गया (भाग 3)
शूर्पणखा की नाक कट जाना आज पूरा दिन हमारे चार वर्षीय जुड़वाँ बच्चों में जोश देखते ही बनता था। शाम होते-होते उनके उतावलेपन की हद पार हो चुकी थी। होती भी क्यों न! हमें इस नये घर में आये आगे पढ़ें
सुनहरी बालों वाली लड़की
शहर की सुबहें हमेशा एक जैसी होती थीं—धुँधली, भागती हुईं, और अपने भीतर अनगिनत अनकही कहानियाँ लिए हुए। लेकिन उस दिन कुछ अलग था। शायद हवा में कोई नया एहसास घुला हुआ था, या शायद यह सिर्फ़ आर्यन के आगे पढ़ें
हास्य/व्यंग्य
किफ़ायत के आदेशः भाषण छोटे किए जाएँगे, ठेलों में ही रोड शो
पार्टी ने आदेश किया, “टॉप-टू-बॉटम लेवल के सभी नेताजी ऑनलाइन मीटिंग के लिए उपस्थित हो जाएँ। हमें महत्त्वपूर्ण चर्चा करनी है।” ऐसी मीटिंग शुरू हुई तो एक नेता ने अपनी आईडी छिपाकर सवाल किया, “आपने सबको इकट्ठा होने की आगे पढ़ें
कॉकरोच जनता पार्टी और सहमा कॉकरोच
भारतीय लोकतंत्र सचमुच एक अद्भुत प्रयोगशाला है, जहाँ समस्याएँ कम और उनके प्रतीक अधिक पैदा होते हैं। यहाँ बेरोज़गारी वर्षों तक सरकारी फ़ाइलों में धूल खाती रहती है, प्रतियोगी परीक्षाएँ पीढ़ियों का यौवन निगलती रहती हैं, नियुक्तियाँ अदालतों और आगे पढ़ें
जंगल की राजनीति में हाशिए पर धकेले गए कॉकरोच समाज की राजनीतिक अहमियत साबित करने की कोशिश
सिंह, भालू, तेंदुए, बाघ आदि अपनी ताक़त के कारण जंगल की सत्ता के केंद्र में रहते थे। लोमड़ी, बंदर, भेड़िए और गधों ने भी जंगल की राजनीति में ठीकठाक नाम कमाया था। भेड़, बैल, साँड़ और कुत्तों जैसे जीवों आगे पढ़ें
जंगल को सिद्धि के शिखरों तक पहुँचाने के लिए राजा शेर की अद्भुत बचत योजना
.राजा शेर ने वीडियो में अपील की, “मेरे प्यारे जंगलवासियों, आप सबको खाना कम करना पड़ेगा, जंगलभक्ति दिखाने का यही समय है।” राजा शेर के सलाहकार भालूभाई जल्दबाज़ी में मिलने आए। चिंतित दिखाई दे रहे भालूभाई ने राजा से कहा, आगे पढ़ें
जंगल में सर्वाधिक कमाई करने वाले मंत्री हाथी हरखपदूड़ा का भाषण
महाराजा सिंह की सरकार में परिवहन मंत्रालय सँभालने वाले हाथीभाई सबसे अधिक कमाई करने वाले मंत्री बन गए। यह उपलब्धि हासिल करने के बाद ख़ुशी से फूले न समाते हाथीभाई ने सिंह की शैली में लाइव संबोधन किया . आगे पढ़ें
पति कल्याण योजना
सोने की कम ख़रीददारी करने का आह्वान सुनकर पतियों में ख़ुशी की लहर दौड़ गई है। कुछ तो झूम उठे कि ऐसे युद्ध होते रहेंगे तो सोने ख़रीदने के दिन चले जायेंगे और जो पति दो रोटी खाते थे आगे पढ़ें
वोट और नोट
वोट और नोट का रिश्ता शब्दातीत है। वोट मिले तो नोट मिलते हैं। वोट देते हैं तो भी नोट मिलते हैं। खोट नोट में हो कि वोट में, खोट—खोट नहीं कहलाती। चोट नोट की हो या वोट की, चोट—चोट आगे पढ़ें
हमारी नेशनल टॉफ़ी कौन-सी-लॉलीपॉप या रेवड़ी?
पार्टी कार्यालय में पुराने सुनहरे दिनों की तरह सेव-ममरा की जगह अब थोड़ी स्टाइलिश झालमूड़ी फाँकी जा रही थी, तभी अचानक आ धमके बड़े नेताओं ने उन्हें डाँटा। “मूर्खों, कब तक यूँ अतीत में ही खोए रहोगे? हटाओ इस आगे पढ़ें
आलेख
अल्केबुलान बनाम अफ़्रीका
नोट: प्रस्तुत लेख में प्राचीन अल्केबुलान की भौगोलिक, सामाजिक, राजनीतिक और व्यापारिक स्थिति बताने का प्रयास है। अफ़्रीका का प्राचीन नाम ‘अल्केबुलान’ था। अल्केबुलान का अर्थ था “मानवता की जननी” या “ईडन का बगीचा”। इस नाम का उपयोग आगे पढ़ें
आकर्षण का नियम
हम सभी जाने-अनजाने में इस नियम का प्रयोग कर रहे हैं, मगर असल जीवन में इससे पूर्णतः अनभिज्ञ हैं। यह नियम नैसर्गिक हैं, अटल, अविनाशी है। यह नियम हमारे जीवन का निर्माण कर रहा हैं। संपूर्ण सृष्टि, इसके प्राणी, आगे पढ़ें
कृत्रिम मेधा और भारत की भाषाई संप्रभुता के विविध आयाम
मानव सभ्यता एक ऐसे दौर में प्रवेश कर चुकी है जहाँ कृत्रिम मेधा केवल तकनीकी उपकरण नहीं रह गई, बल्कि ज्ञान, शासन, शिक्षा, अर्थव्यवस्था, संचार और संस्कृति की दिशा तय करने वाली निर्णायक शक्ति बनती जा रही है। दुनिया आगे पढ़ें
गंभीर लोगों के जीवन का मंत्र—हँसना मना है
जो व्यक्ति रोज़ कुछ नया नहीं सोचता, उसे युवा कभी नहीं कहा जा सकता। इसलिए रोज़ कुछ नया सोचते रहना चाहिए। बेंजामिन फ़्रैंकलिन का नाम तो सभी ने सुना है। 18वीं सदी की अमेरिकी दुनिया में उनका बड़ा प्रभाव आगे पढ़ें
छपे हुए शब्दों का महत्त्व आज भी है
सामाजिक–राजनीतिक विषयों पर लिखते हुए जब मेरे लेख और टिप्पणियाँ किसी समाचार पत्र में प्रकाशित होती हैं, और विशेषकर तब, जब उसके साथ मेरा मोबाइल नंबर भी प्रकाशित होता है, तो पाठकों की सीधी प्रतिक्रिया के रूप में आने आगे पढ़ें
प्रवासी कथेतर साहित्य नए समय और नई ज़मीन का विश्वसनीय दस्तावेज़ है
साहित्य अकादमी के माध्यम से स्वर्गीय कमल किशोर गोयनका जी का प्रवासी साहित्य को तीन खंडों (कविता, कहानी और कथेतर साहित्य) में प्रकाशित करने का स्वप्न साकार होने की प्रक्रिया में है। इन तीन खंडों के तीन संपादक भी आगे पढ़ें
हिंदी पत्रकारिता में महिलाएँ: 200 साल बाद भी अधूरी यात्रा
जब 1826 में पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने कलकत्ता से ‘उदंत मार्तंड’ का प्रकाशन किया, तो यह सिर्फ़ एक अख़बार की शुरूआत नहीं थी। यह हिंदी भाषी समाज के लिए आधुनिकता की खिड़की खुलने का क्षण था। लेकिन इस आगे पढ़ें
समीक्षा
ग्लोबल साउथ की आवाज़ों का साहित्यिक दस्तावेज़: काली स्याही सूर्य शब्द
समीक्षित पुस्तक: काली स्याही सूर्य शब्द लेखक: अवधेश कुमार सिन्हा प्रकाशक: सम्भावना प्रकाशन पृष्ठ संख्या: 288 ₹450.00 उपलब्धता: काली स्याही सूर्य शब्द (Amazon.in) ISBN: 978-9382666585 विश्व साहित्य के मानचित्र पर जब हम दृष्टि डालते हैं तो एक विचित्र असंतुलन दिखाई देता आगे पढ़ें
जब तक ज़िन्दा हैं: लोकरुचि और सहज ग्राम्य-संवेदना की कहानियाँ
समीक्षित पुस्तक: जब तक ज़िन्दा हैं (कहानी संग्रह) लेखक: कुँवर दिनेश सिंह प्रकाशक: हिन्दी साहित्य निकेतन मूल्य: ₹220.00 वर्तमान स्वरूप में कहानी हिंदी साहित्य में आधुनिक विधा के रूप में ही मान्य है। किन्तु किसी भी आधुनिक भारतीय भाषा का आगे पढ़ें
वर्तमान को दर्शाते हुए खरी-खरी कह जाने वाला दस्तावेज़—‘साहित्य की गुमटी’
समीक्षित पुस्तक: साहित्य की गुमटी (व्यंग्य संकलन) लेखक: धर्मपाल महेंद्र जैन शिवना प्रकाशन, सीहोर द्वारा प्रकाशित प्रथम संस्करण: 2025 मूल्य: ₹275.00 पृष्ठ संख्या: 153 प्रभावी शैली के वरिष्ठ व्यंग्यकार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशेष पहचान रखने वाले सम्मानीय लेखक, प्रवासी आगे पढ़ें
समकालीन जीवन की नब्ज़ पर उँगली रखती लघुकथाएँ—पूजा अग्निहोत्री
पुस्तक: अपेक्षित मौन और अन्य लघुकथाएँ लेखक: सन्दीप तोमर विधा: लघुकथा प्रकाशन: स्पर्श प्रकाशन प्रकाशन वर्ष: 2026 मूल्य: ₹250/- ‘अपेक्षित मौन और अन्य लघुकथाएँ’ समकालीन हिंदी लघुकथा-साहित्य में एक उल्लेखनीय हस्तक्षेप के रूप में सामने आती है। सन्दीप तोमर का आगे पढ़ें
संस्मरण
ढाई दशक का अनुराग: आत्मीय सह-अस्तित्व के पच्चीस बरस
(विशेष आलेख-सुशील शर्मा) समय की नदी कितनी सहजता से बहती है कि देखते-देखते ढाई दशक बीत गए। आने वाली पच्चीस मई को कला जगत की दो उद्भट विभूतियों आशुतोष राना और रेणुका शहाने के दांपत्य जीवन की पच्चीसवीं आगे पढ़ें
विवेक हॉस्टल रूम नंबर 186
पुरानी अलमारी के एक कोने में दबा हुआ वह पहचान पत्र जब वर्षों बाद हाथ में आया, तो लगा जैसे समय ने अचानक अपनी धूल झाड़ दी हो। हल्के नीले रंग का वह आई कार्ड केवल एक परिचय पत्र आगे पढ़ें
शब्दों को इंसानी रूह की धड़कन बना दिया बशीर साहब ने
स्मृति शेष- डॉ. बशीर बद्र: उर्दू अदब का वह नूर, जो हमेशा हमारे साथ रहेगा डॉ. बशीर बद्र केवल एक शायर का नाम नहीं है, बल्कि उस अहसास का नाम है जो इंसान को भीड़ में भी ख़ुद से आगे पढ़ें
साक्षात्कार
साहित्य के बहुरंगी हस्ताक्षर, संजीव जयसवाल ‘संजय’ से एक संवाद
समकालीन हिंदी साहित्य के व्यापक आकाश में संजीव जयसवाल एक ऐसे सशक्त, बहुआयामी और निरंतर सक्रिय रचनाकार के रूप में प्रतिष्ठित हैं, जिन्होंने अपनी सृजनशीलता के माध्यम से साहित्य की विविध विधाओं को समृद्ध किया है। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर-खीरी आगे पढ़ें
कविताएँ
शायरी
समाचार
साहित्य जगत - विदेश
विश्व हिंदी दिवस कार्यक्रम
“मातृभाषा हमारे जीवन का आधार है, हिंदी के विकास में योगदान देनेवाले ग़ैर हिंदी भाषिक विद्वानों ने अपनी मातृभाषा का…
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ब्रिटेन की डॉ. वंदना मुकेश को मध्य प्रदेश शासन, संस्कृति विभाग..
मध्य प्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा प्रतिवर्ष राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिन्दी को समृद्ध करने वाले विद्वानों को…
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यॉर्क, यूके में भारतीय प्रवासी समुदाय का ऐतिहासिक काव्य समारोह
दिनांक: 26 अप्रैल 2025 स्थान: यॉर्क, यूनाइटेड किंगडम 26 अप्रैल 2025 को यॉर्क इंडियन कल्चरल एसोसिएशन के तत्वावधान में…
आगे पढ़ेंसाहित्य जगत - भारत
व्यंग्य की धार और सामाजिक सरोकारों से सजी भोजपाल साहित्य..
भोपाल। भोजपाल साहित्य संस्थान के अंतर्गत संचालित ‘व्यंग्य भोजपाल’ की मासिक व्यंग्य गोष्ठी का आयोजन 10 मई को भोपाल…
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डॉ. रमा द्विवेदी कृत ‘गंगा में तैरते मिट्टी के दीये’ काव्य..
युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच (पंजीकृत न्यास) आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना राज्य शाखा एवं केंद्रीय हिंदी संस्थान के संयुक्त तत्वावधान…
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डॉ. अमित धर्मसिंह के ग़ज़ल संग्रह ‘बग़ैर मक़्ता’ का हुआ..
दिल्ली। 20 दिसंबर, 2025 को आयोजित हुई नव दलित लेखक संघ की मासिक गोष्ठी में डॉ. अमित धर्मसिंह के…
आगे पढ़ेंसाहित्य जगत - भारत
डाॅ. लक्ष्मी शंकर वाजपेयी के कविता संग्रह ‘कवि के मन से’ का..
दिनांक 30 अप्रैल 2026 को साहित्य अकादमी, नई दिल्ली के सभागार में विख्यात कवि लक्ष्मी शंकर वाजपेयी के कविता…
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मुकेश कुमार ऋषि वर्मा की कृति ‘उगता सूर्य’ का हुआ विमोचन
शाहगंज (आगरा)। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ने श्री चित्रगुप्त भगवान संस्था सभागार में अपना 56वाॅं प्रांतीय अधिवेशन व शैक्षिक…
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डॉ. देवेंद्र शर्मा का काव्य संग्रह ‘अनुभव के आखर’ लोकार्पित
हैदराबाद, 15 दिसंबर, 2025— अपने दौर के अंतरराष्ट्रीय स्तर के वनस्पति शास्त्र वैज्ञानिक व कवि स्व. डॉ. देवेंद्र शर्मा…
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