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    इक्कीसवीं सदी की कहानियाँ
    इक्कीसवीं सदी की कहानियाँ आवरण चित्र: श्रेया श्रुति   साहित्य कुञ्ज के ‘इक्कीसवीं सदी की कहानियाँ’.. आगे पढ़ें
उसका क्या
कवि, स्वर, चित्र और निर्माण: अमिताभ वर्मा - उसका क्या

साहित्य कुञ्ज के इस अंक में

कहानियाँ

आख़िरी निवाला

  रेलवे स्टेशन की ठिठुरती रात में ठंड सिर्फ़ शरीर नहीं, इंसानियत भी जमा रही थी। लोग गर्म कपड़ों में लिपटे भाग रहे थे। किसी के हाथ में कॉफ़ी थी, किसी के हाथ में खाना। प्लैटफ़ॉर्म के कोने में बैठा आगे पढ़ें


आख़िरी रोटी

  रवि शहर में नौकरी करता था। वर्षों बाद गाँव आया तो उसे माँ बहुत कमज़ोर लगी। वह हर बात पर टाल देती “अब उम्र हो गई है बेटा, भूख कम लगती है।”  रवि ने ध्यान दिया, माँ आज भी आगे पढ़ें


आपदा

  “हैप्पी बर्थडे,” सुबह सात बजे बहन ने मुझे मोबाइल किया था, “अपने स्कूल से मैं सीधे तुम्हारे पास पहुँच रही हूँ। दोपहर का खाना भी बनाऊँगी और शाम को पकौड़ी और हलवा भी . . .” “हैप्पी बर्थडे टू आगे पढ़ें


तस्वीर

  अमित पाँच साल बाद विदेश से लौटा था। घर में उत्सव जैसा माहौल था। वह हर चीज़ की तस्वीरें ले रहा था नया मकान, नई कार, सजावट, रिश्तेदार।  माँ सुबह से उसके लिए पकवान बना रही थी। बार-बार कहती, आगे पढ़ें


धूप के उस पार की सुबह

  रात के ग्यारह बजे थे। शहर की ऊँची इमारतों के बीच काँच की दीवारों से चमकता वह कॉर्पोरेट कार्यालय अभी भी जगमगा रहा था। अधिकतर केबिन ख़ाली हो चुके थे, पर तीसरी मंज़िल के कोने वाले डेस्क पर एक आगे पढ़ें


बुढ़ापा 

  उसने बचपन देखा फिर जवानी देखी। अब 60 वर्ष का हो चला है, यानी शनैः-शनैः बुढ़ापे की ओर क़दम बढ़ा रहा है। उसने जब बुढ़ापे के लक्षण देखा तो उसकी आँखों के आगे झूल गया वह झुर्रीदार चेहरा, कमर आगे पढ़ें


वेकेशन का सदुपयोग

  ढोलू और भोलू दोनों मित्र देवपुर में रहते थे। उनकी परीक्षा समाप्त हो चुकी थी और छुट्टियाँ पड़ गई थीं। इसलिए वे टीवी देखने में मज़ा लेने लगे। जब टीवी से ऊब जाते तो मोबाइल पर गेम खेलने लगते। आगे पढ़ें


संस्कारों की विरासत

  सुबह की शान्ति को भंग करती हुई मोबाइल की घंटी बजी। मैंने जैसे ही फोन उठाया, उधर से बेटे की चिंतित आवाज़ आई, “मम्मी, सामान घर पहुँच गया होगा . . . पापा से कहना कि बोरी में हाथ आगे पढ़ें


सम्मान

  शहर के बड़े होटल में सम्मान समारोह था। राघव को वर्ष का सफल उद्योगपति चुना गया था।  मंच पर पहुँचते ही तालियों की गड़गड़ाहट गूँज उठी। राघव ने भाषण दिया, “मैंने जीवन में बहुत संघर्ष किया है। अपनी मेहनत आगे पढ़ें


हास्य/व्यंग्य

अपने जब बने असहनीय 

  हमारे परिवार के एक निजी मित्र पिछले लगभग दस वर्षों में एक-एक करके मेरे तीन दुश्मनों को पल में ही जड़ से उखाड़ फेंकने में सफल रहे हैं। ये दुश्मन जो कभी मेरे अपने थे और बचपन से ही आगे पढ़ें


अभिनंदन ग्रंथ इन प्रोग्रेस

  रत्ती भर भी माननीय सम्मानीय न होने के बाद भी गधे से सूअर तक चाहता है कि जनता उसे माननीय, सम्मानीय कह कर संबोधित करे। अगर ऐसा नहीं होता तो कुछ गधे टाइप के गधे कोर्ट तक चले जाते आगे पढ़ें


आनंदो . . . आनंदो, एल नीनो आ रहा है

  सरकारी दफ़्तर में एक अधिकारी लड्डू का डिब्बा लेकर सभी को बाँटने निकले। लड्डू देते हुए वह कह रहे थे, “आ रहा है . . . आ रहा है . . . आनंदो . . . आनंदो . . आगे पढ़ें


पिक्चर परिवर्तन पार्टी

  फ़िल्म के सेट पर दो-चार एक्स्ट्रा कलाकार हीरो के पास दौड़ते हुए आए और उसे कंधों पर उठा कर चिल्लाने लगे, “हमारा नेता कैसा हो, फ़िल्म के हीरो जैसा हो।” हीरो ने पहले तो गद्‌गद्‌ होने की एक्टिंग की, आगे पढ़ें


बंगाल चुनाव में हिंसा टालिए: ट्रम्प की शान्ति अपील

  बंगाल में चुनाव घोषित होते ही ट्रम्प घबरा गए। उन्होंने तुरंत नेतन्याहू को फोन किया, “डियर दोस्त, अब हमें ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध रोक देना पड़ेगा।” नेतन्याहू नाराज़ हो गए, “अरे यार, ये तो अभी झाँकी है, आगे लड़ाई आगे पढ़ें


बिल्लो रानी कहो तो जान दे दूँ

बिल्लो रानी को एक मज़बूत प्रेमी की आश्यकता महसूस हुई। वह उसी को अपना प्रेम समर्पण करेगी जो जान देने की जंग में सफल होगा। बड़े-बड़े प्रेमी बिल्लो रानी को प्राप्त करने के लिए अपनी जान तक भी देने को आगे पढ़ें


योर सिक्स, माई नाइन

  तब के अभिनेता और अब के साबुन–मंजन के सबसे बड़े विक्रय प्रतिनिधि अमिताभ बच्चन की बहुत साल पहले एक फ़िल्म आई थी। जिसका नाम था ‘सुहाग’। इस फ़िल्म का लंबू हीरो अपनी कोल्हापुरी चप्पल सामने वाले को चप्पल उल्टी आगे पढ़ें


लाइफ़ की क़ीमत जैकेट से भी कम है

  बरगी डैम की लहरों ने इस बार पानी से ज़्यादा सच उछाला है। 11 सैलानी डूबे—कहानी वही पुरानी, पटकथा वही सरकारी। फ़र्क़ सिर्फ़ इतना कि इस बार लाइफ़ जैकेटें थीं . . . मगर सिस्टम के पास। यात्रियों के आगे पढ़ें


वॉट्सऐप यूनिवर्सिटी के ग्रेजुएट्स

  ​आजकल अगर कोई संस्थान सबसे जल्दी डिग्री देता है, तो वह है ‘वॉट्सऐप यूनिवर्सिटी’। यहाँ प्रवेश के लिए किसी योग्यता की ज़रूरत नहीं है, कोई फ़ीस नहीं है और परीक्षा तो बिलकुल भी नहीं। बस, सुबह उठकर वॉट्सऐप पर आगे पढ़ें


शान्तिप्रिय साहित्यकारों का ठंडे दिल से युद्ध चिंतन

  जिसने अकादमी-परिषद का युद्ध देख लिया, उसके लिए बाक़ी दुनिया के युद्ध क्या मायने रखते हैं? एक वृद्ध नवोदित लेखक ने अपनी शर्ट के किनारे से चश्मे के शीशे साफ़ करते हुए कहा, “सज्जनो, मुझे अचानक अहसास हुआ है आगे पढ़ें


हम ही हैं राष्ट्र, हमसे ही है राष्ट्र

  मैं बचपन से ही राष्ट्रसेवा करना चाहता था। जब दूसरे बच्चे डॉक्टर, इंजीनियर और वैज्ञानिक बनने का सपना देखते थे, तब मैं बचपन से ही बँगला, लालबत्ती, सरकारी गाड़ी और पाँच सितारा बैठकों का सपना देखा करता था। मुझे आगे पढ़ें


आलेख

चरित्र-विचार से व्यवहार तक

  (मानव चरित्र को व्याख्यायित करता आलेख-सुशील शर्मा)    समाज में जब भी “चरित्र” शब्द उच्चारित होता है, प्रायः उसका अर्थ स्त्री-पुरुष सम्बन्धों की मर्यादा तक सीमित कर दिया जाता है। किसी व्यक्ति के चरित्र का मूल्यांकन करते समय लोग आगे पढ़ें


नृसिंह का प्राकट्य अन्याय के विरुद्ध उद्घोष

(नृसिंह जयंती पर विशेष आलेख—सुशील शर्मा)    भारतीय अध्यात्म में अवतार केवल कथा नहीं होते, वे समय के संकटों में सत्य की पुनर्स्थापना के संकल्प होते हैं। भगवान नृसिंह का प्राकट्य इसी संकल्प की अग्नि से जन्मा वह क्षण है, आगे पढ़ें


विवाह के समय दुलहन के हाथों में शोभता ‘चूड़ा’

  मेहँदी से रँगे नववधू के हाथों में चूड़ा पहनाने से सौंदर्य खिल उठता है। नाज़ुकता, सौंदर्य, पवित्रता, सौभाग्य और लज्जा का प्रतीक मानी जाने वाली चूड़ी स्त्रीत्व का प्रतिनिधित्व करती है। इसी कारण बिना चूड़ियों वाले हाथों वाली स्त्री आगे पढ़ें


समीक्षा

एक बंदिनी का अपराध और प्रेम से द्वंद्व: ‘कारागार’

एक बंदिनी का अपराध और प्रेम से द्वंद्व: ‘कारागार’

उपन्यास: कारागार लेखिका: डॉ. आरती ‘लोकेश’ मूल्य: ₹ 230.00 पृष्ठ संख्या: 224 प्रकाशक: साहित्य पीडिया पब्लिशिंग नोएडा (भारत) ISBN: 978-81-937022-1-5 प्रेम में छला व्यक्ति सपाट मार्ग में भी गड्ढों की कल्पना से सतर्क होकर चलता है। जिसे एक कहावत ‘दूध आगे पढ़ें


अन्य

आभार-पत्र

  आदरणीया डॉ. आरती स्मित जी, सादर प्रणाम। आपके कथा-संसार के साथ एक दीर्घ और तन्मय संवाद के पश्चात यह पत्र लिखते हुए मन में गहरी कृतज्ञता और आत्मीयता का भाव है।  आपके दोनों कहानी-संग्रह—विशेषतः “बदलते पल” और “सीट नं. आगे पढ़ें


कविताएँ

शायरी

समाचार

साहित्य जगत - विदेश

विश्व हिंदी दिवस कार्यक्रम

विश्व हिंदी दिवस कार्यक्रम

11 Jan, 2026

“मातृभाषा हमारे जीवन का आधार है, हिंदी के विकास में योगदान देनेवाले ग़ैर हिंदी भाषिक विद्वानों ने अपनी मातृभाषा का…

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ब्रिटेन की डॉ. वंदना मुकेश को मध्य प्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा राष्ट्रीय निर्मल वर्मा सम्मान 2025 

ब्रिटेन की डॉ. वंदना मुकेश को मध्य प्रदेश शासन, संस्कृति विभाग..

9 Oct, 2025

  मध्य प्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा प्रतिवर्ष राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिन्दी को समृद्ध करने वाले विद्वानों को…

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यॉर्क, यूके में भारतीय प्रवासी समुदाय का ऐतिहासिक काव्य समारोह

यॉर्क, यूके में भारतीय प्रवासी समुदाय का ऐतिहासिक काव्य समारोह

16 May, 2025

  दिनांक: 26 अप्रैल 2025 स्थान: यॉर्क, यूनाइटेड किंगडम 26 अप्रैल 2025 को यॉर्क इंडियन कल्चरल एसोसिएशन के तत्वावधान में…

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साहित्य जगत - भारत

डॉ. रमा द्विवेदी कृत ‘गंगा में तैरते मिट्टी के दीये’ काव्य संग्रह लोकार्पित 

डॉ. रमा द्विवेदी कृत ‘गंगा में तैरते मिट्टी के दीये’ काव्य..

11 Mar, 2026

  युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच (पंजीकृत न्यास) आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना राज्य शाखा एवं केंद्रीय हिंदी संस्थान के संयुक्त तत्वावधान…

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डॉ. अमित धर्मसिंह के ग़ज़ल संग्रह ‘बग़ैर मक़्ता’ का हुआ लोकार्पण

डॉ. अमित धर्मसिंह के ग़ज़ल संग्रह ‘बग़ैर मक़्ता’ का हुआ..

22 Jan, 2026

  दिल्ली। 20 दिसंबर, 2025 को आयोजित हुई नव दलित लेखक संघ की मासिक गोष्ठी में डॉ. अमित धर्मसिंह के…

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गाहलियाँ विद्यालय के छात्राओं ने आर्ट्स पेंटिंग से चमकाया विद्यालय

गाहलियाँ विद्यालय के छात्राओं ने आर्ट्स पेंटिंग से चमकाया..

20 Jan, 2026

कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश, राजकीय उत्कृष्ट वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला गाहलियां के एक भारत और श्रेष्ठ भारत और इको क्लब के छात्रों…

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साहित्य जगत - भारत

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा की कृति ‘उगता सूर्य’ का हुआ विमोचन 

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा की कृति ‘उगता सूर्य’ का हुआ विमोचन 

22 Jan, 2026

शाहगंज (आगरा)। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ने श्री चित्रगुप्त भगवान संस्था सभागार में अपना 56वाॅं प्रांतीय अधिवेशन व शैक्षिक…

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डॉ. देवेंद्र शर्मा का काव्य संग्रह ‘अनुभव के आखर’ लोकार्पित

डॉ. देवेंद्र शर्मा का काव्य संग्रह ‘अनुभव के आखर’ लोकार्पित

6 Jan, 2026

  हैदराबाद, 15 दिसंबर, 2025—  अपने दौर के अंतरराष्ट्रीय स्तर के वनस्पति शास्त्र वैज्ञानिक व कवि स्व. डॉ. देवेंद्र शर्मा…

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‘क से कविता’ का बाल-कविता समारोह संपन्न

‘क से कविता’ का बाल-कविता समारोह संपन्न

13 Nov, 2025

बाल-दिवस-विशेष:  हैदराबाद, 13 नवंबर, 2025। हिंदी-उर्दू कविता को नई पीढ़ी में लोकप्रिय बनाने के लिए समर्पित संस्था “क से कविता”…

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