संपादकीय - जय जवान, जय (बेचारा) किसान
साहित्य कुञ्ज के इस अंक में
कहानियाँ
इंस्टाग्राम वाला प्यार
रिया को बचपन से ही छायाचित्र लेने का शौक़ था। जब उसके हमउम्र बच्चे खिलौनों, खेलों और अपने छोटे-छोटे झगड़ों में व्यस्त रहते थे, रिया किसी भी साधारण-सी वस्तु को दूसरी नज़र से देखने लगती। वह सुबह की किरण आगे पढ़ें
चकोर की व्यथा
चकोर अक्सर इस बात को दोहराते रहते हैं कि इंसान को उदारता से ग़रीब लोगों की यथासंभव मदद करनी चाहिए। एक लेखक होने के नाते भी वे अक्सर कवि रहीम के इस दोहे का जब तब उल्लेख करते रहते आगे पढ़ें
चार बजे की माँ
सुबह के चार बजे थे। बाक़ी दुनिया नींद में थी, लेकिन प्रियंका की नींद मानो अपराधबोध से भरी हुई टूट गई थी। अलार्म तीन बार बज चुका था, पर थकी हुई आँखों में जैसे समय का कोई मोल नहीं आगे पढ़ें
चींटी ने सबक़ सिखाया
हाथी को अपने बड़े होने का बहुत घमंड था। एक बार एक चींटी को देखा तो हाथी ने उसकी खिल्ली उड़ायी लेकिन शान्तप्रिय चींटी ने कुछ नहीं कहा, हाथी ने देखा कि चींटी मेरे खिल्ली उड़ाने का कोई विरोध आगे पढ़ें
चूक तो हुई थी
“डॉ. वर्मा! माँ की तबीयत ज़्यादा बिगड़ गई है। प्लीज़! ऊपर चलकर देख लीजिए। उन्हें साँस लेने में भयंकर तकलीफ़ हो रही है . . . बार-बार आपको ही याद कर रही हैं।” डॉ. वर्मा की क्लीनिक के ऊपर आगे पढ़ें
तब ढोलक की थाप, थम गई
रईस खान हट्टा-कट्टा, छह फ़ीट का 30 वर्षीय नौजवान था। गाना गाने में वह उस्तादों का उस्ताद माना जाता था। भले ही वह मुस्लिम परिवार से था, परन्तु हिंदू मित्रों के बीच या धार्मिक अवसरों पर वह देवी-देवताओं के आगे पढ़ें
तुलना का बोझ
अमित ने जब अपनी नई चमचमाती कार ख़रीदी, तो उसने सबसे पहले अपने बचपन के मित्र, संजय को दिखाने का निर्णय लिया। संजय एक साधारण, संतुष्ट जीवन जीता था। कार देखते ही अमित ने गर्व से कहा, “संजय, कैसी आगे पढ़ें
नई बोध कथा
शाम हो चली थी। जिस कार्य के लिये इस शहर में आए थे उसका कोई भी काम अब आज और नहीं हो सकता था। यानी अब शाम ख़ाली थी। दूसरे शहर में परिचित भी कहाँ होते हैं जिनके साथ आगे पढ़ें
शिक्षक या सेल्समैन?
यह कहानी है अविनाश सर की—एक ईमानदार, आदर्शवादी और प्रतिभाशाली शिक्षक की, जो शिक्षा को अपने जीवन का धर्म समझते हैं और विद्यालय को मंदिर। लेकिन जब उनका सामना एक ऐसे विद्यालय से होता है, जिसका संचालन एक पूर्व आगे पढ़ें
ख़ूब उल्लू बनाया
लखनऊ-प्रयागराज हाईवे पर एक ढाबे में टैक्सी ड्राइवर आकाश चाय-नाश्ता कर रहा था। तभी अचानक लगभग चौबीस साल की तेज़ क़दमों से दौड़ती हुई एक लड़की आरोही हाथ में सूटकेस लिए उसके पास आ कर बोली, “चलिए, लखनऊ जाना आगे पढ़ें
हास्य/व्यंग्य
नई स्कीम घोषित: विवाह उपस्थिति सहायता अनुदान योजना
“सीज़न के अनुसार एक नई योजना घोषित करनी है,” मंत्रीजी ने फ़रमाया। “सर, सर्दी शुरू हो गई है तो क्या हम निर्धन लोगों के लिए कंबल सहायता योजना शुरू करें?” एक अधिकारी ने पूछा। मंत्रीजी ग़ुस्से में बोले, “ख़बरदार, आगे पढ़ें
राजा सिंह के सहयोगी नेता नेवला कुमार के चुनाव जीतने का रहस्य
गिरगिट को भी शरम आ जाए ऐसी अदा से रंग बदलने में माहिर नेवला कुमार जंगल के एक हिस्से के मुख्यमंत्री थे। राजा सिंह की सलाह से नेवला कुमार फिर मैदान मार गए . . . पूरा जंगल राजा आगे पढ़ें
रिश्वत का एक्सक्लूसिव कोड
हे मेरे शहर के सेम पदों पर सेम काम की फ़ाइल खुलवाने, निकलवाने के मनमर्ज़ी की रिश्वत लेने वालों से परेशान रिश्वत खिलाने को विवश आत्माओ! तुम्हें यह जानकर प्रसननता नहीं, हार्दिक प्रसन्नता होगी कि जनाब ने शहर के आगे पढ़ें
शिक्षा में नई डिग्री—बीएलओ बीएड
“अरे बच्चों, स्कूल के बाहर क्यों घूम रहे हो? अपने मास्टर साहब से जाकर कहो कि इंस्पेक्शन आए हैं।” इंस्पेक्शन की टीम गाँव में पहुँची और स्कूल के बाहर खड़े होकर आवाज़ लगाई। एक लड़का बोला, “हमारे एक आगे पढ़ें
आलेख
अंगिका लोकगीतों में श्रीरामचंद्र के जन्मप्रसंग
बारह कलाओं से युक्त परात्पर ब्रह्म के सातवें अवतार श्रीरामचंद्र का दाशरथि ‘राम’ के रूप में प्राकट्य सभी जानते हैं। परन्तु, संभवतः सभी यह नहीं जानते होंगे कि उनके प्राकट्य में अंगजनपद का भी योगदान रहा है। ‘रम्+घञ्= रामः’ आगे पढ़ें
गुरु तेग बहादुर के बलिदान की याद
(गुरु तेग बहादुर का 350वाँ शहीदी दिवस: 24 नवम्बर, 2025) शहीद दिवस एक ऐसा दिन है जब हम उन वीरों को याद करते हैं जिन्होंने देश की आज़ादी और संप्रभुता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। यह आगे पढ़ें
बाल दिवस—स्क्रीन और सपनों के बीच एक मौन संघर्ष
✍️ अमरेश सिंह भदौरिया 14 नवंबर—यह तिथि केवल कैलेंडर का एक अंक नहीं, बल्कि भारतीय चेतना में बसे उस भाव का स्मरण है, जिसे हम बाल दिवस कहते हैं। यह दिन हमें देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू आगे पढ़ें
बेटी पराई नहीं, वह देश का उजाला है
बेटियों का मिट्टी से उठता संघर्ष, संकल्प और गौरव की गाथा भारत की सांस्कृतिक स्मृतियों में बेटी हमेशा से शुभ मानी गई है, कोमल भी, लेकिन अडिग भी, नरम भी, लेकिन निर्भीक भी। लोकगीतों में उसे पराई कहा गया, पर आगे पढ़ें
मनुष्य का परिवर्तन: शाश्वत द्वंद्व और जीवन का विकास पथ
एक गहन दार्शनिक विचार “मनुष्य न तो मौसम है और न ही तापमान, फिर भी न जाने क्यों बदल जाता है” को आधार बनाकर, मानवीय परिवर्तन की जटिल मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और दार्शनिक परतों की विस्तृत समीक्षा और विवेचना यहाँ आगे पढ़ें
मेरे आदर्श, अखंड भारत के शिल्पी—लौह पुरुष सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर एक भावपूर्ण नमन
आज, 31 अक्टूबर 2025 को जब पूरा राष्ट्र भारत रत्न सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती मना रहा है, तो एक रचनाकार के रूप में मेरा हृदय श्रद्धा, गर्व और कृतज्ञता से भर उठता है। मेरे लिए सरदार आगे पढ़ें
रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी के काव्य में राष्ट्रवाद, सामाजिक न्याय और सामाजिक दृष्टि
दिनकर जी का जन्म 23 सितम्बर 1908 को बिहार के मुंगेर ज़िले के सिमरिया गाँव में हुआ था। 24 अप्रैल 1974 को दिवंगत हुए। विद्यार्थी जीवन में इतिहास, राजनीति एवं दर्शनशास्त्र दिनकर जी के पसंदीदा विषय थे। उन्हें संस्कृत, आगे पढ़ें
वंदे मातरम् और बिरसा मुंडा: भारत की स्वाधीनता और संस्कृति की ज्योति के 150 वर्ष!
बिरसा मुंडा के संघर्ष की क्या विशिष्टता थी? वंदे मातरम् गीत किस संस्था में नियमित गाया जाता था? हमारे इतिहास के रोमांचक प्रसंग। दुनिया में जहाँ मानवजाति का पालना बँधा, ऐसे हरे-भरे जंगलों से भरे अफ़्रीका में ही आगे पढ़ें
विवेकानंद के सपनों की ओर बढ़ता भारत
विवेकानंद जयंती पर विशेष स्वामी विवेकानंद के सपनों का भारत एक आदर्श राष्ट्र की कल्पना मात्र नहीं है, बल्कि एक वास्तविकता है, जिसे हमें हासिल करना है और हम करके रहेंगे। हम ऐसे राष्ट्र का विकास करने पर आगे पढ़ें
षष्ठम भाव: भौतिक व आध्यात्मिक व्याख्या
जन्म कुंडली में तीसरे, छठवें और ग्यारहवें भाव को सामूहिक रूप से त्रिषडाय भाव कहा जाता है। इसी प्रकार जन्म कुंडली के तीसरे, छठवें, दसवें तथा ग्यारहवें भाव के समूह को उपचय भाव कहते हैं तथा छठवें, आठवें तथा आगे पढ़ें
संत त्यागराज की राम भक्ति और उनका कृतित्व—एक विहंगावलोकन
संगीत शिरोमणि श्री राम के अनन्य भक्त स्वनामधन्य काकर्ला त्यागब्रह्मम दक्षिण भारत की उन विभूतियों में से थे जिन्होंने संगीत साधना को ‘असाध्य’ को साधने का अवलम्ब बनाया और अपनी अंतर्निहित भाव सलिला को असंख्य गीत लहरियों में पिरो कर आगे पढ़ें
सतत वैज्ञानिक अनुसंधान और भाषा
हिंदी भाषा के जनक आदरणीय भारतेंदु हरिश्चंद्र जी ने लिखा है: “निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल। अंग्रेज़ी पढ़ि के जदपि, सब गुन होत प्रवीन पै निज भाषा-ज्ञान आगे पढ़ें
समकालीन विश्व कविता और शैलेन्द्र चौहान की कविताएँ: एक तुलनात्मक अध्ययन
समकालीन विश्व साहित्य एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ विविध सभ्यताओं, संस्कृतियों और राजनीतिक–सामाजिक अनुभवों का अंतर्संवाद पहले की तुलना में कहीं अधिक सघन और विस्तारपूर्ण है। कविता, जो हमेशा मानव संवेदना की सबसे तीक्ष्ण अभिव्यक्ति मानी जाती आगे पढ़ें
सुनीति कुमार चटर्जी: आधुनिक भारतीय भाषाविज्ञान के अप्रतिम शिल्पी
भारतीय भाषाविज्ञान के इतिहास में जिन नामों को उनके शोध-वैभव, व्यापक दृष्टि और विश्वस्तरीय मान्यता के आधार पर आदरपूर्वक स्मरण किया जाता है, उनमें प्रोफ़ेसर सुनीति कुमार चटर्जी का स्थान अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। 20वीं शताब्दी में भारतीय भाषा अध्ययन आगे पढ़ें
स्नेह सागर: डॉ. शंकर सिंह तोमर!
कृशकाय, उन्नत ललाट, निर्भीक चाल, आकर्षक व्यक्तित्व; यह हैं डॉ. शंकर सिंह तोमर। डॉ. तोमर बहुमुखी व्यक्तित्व के धनी हैं। वे एक अच्छे प्राध्यापक, प्रखर चिंतक, सुलझे हुए भाषा विद, सुधी समीक्षक और सहृदय शोध निर्देशक हैं। सम आगे पढ़ें
समीक्षा
राधेश्याम : नाटक/फ़िल्म के अभिनय-सूत्र
राधेश्याम कथावाचक की रचनाओं और लोक साहित्य के विशेषज्ञ हरिशंकर शर्मा द्वारा संपादित पुरस्तक ‘रंग राधेश्याम नाटक फिल्म के अभिनय सूत्र किताब उनके तीन अप्रकाशित नाटक ‘उद्धार’, ‘आजादी’ और ‘धन्ना भगत’ पर केंद्रित है। इन नाटकों में किसान, मजदूर, सूदखोर आगे पढ़ें
लघुकथा के विकास में ‘कथादेश’ पत्रिका का योगदान
कथादेश: पुरस्कृत लघुकथाएँ: संपादक हरिनारायण, सुकेश साहनी प्रकाशन वर्ष: 2020 मूल्य: 350 प्रकाशक: नयी किताब प्रकाशन, 1/11829, ग्राउंड फ्लोर, पंचशील गार्डन, नवीन शाहदरा, दिल्ली-110032 कथादेश: पुरस्कृत लघुकथाएँ ‘कथादेश’ का साहित्य की विभिन्न विधाओं और अभिव्यक्ति के विविध रूपों के विकास आगे पढ़ें
संस्मरण
मृत्यु और जन्म
(संक्षिप्त भाव): मृत्यु और जन्म मनुष्य के लिए सदा रहस्य रहे हैं। जीवन, जन्म और मृत्यु के बीच हथेली भर होता है। कुछ मृत्युएँ धीरे-धीरे खिसक कर आती हैं। कुछ अचानक। और कुछ स्तब्ध और आश्चर्यचकित कर जाती हैं। आगे पढ़ें
कविताएँ
शायरी
समाचार
साहित्य जगत - विदेश
ब्रिटेन की डॉ. वंदना मुकेश को मध्य प्रदेश शासन, संस्कृति विभाग..
मध्य प्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा प्रतिवर्ष राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिन्दी को समृद्ध करने वाले विद्वानों को…
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यॉर्क, यूके में भारतीय प्रवासी समुदाय का ऐतिहासिक काव्य समारोह
दिनांक: 26 अप्रैल 2025 स्थान: यॉर्क, यूनाइटेड किंगडम 26 अप्रैल 2025 को यॉर्क इंडियन कल्चरल एसोसिएशन के तत्वावधान में…
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हिन्दी राइटर्स गिल्ड कैनेडा द्वारा आयोजित ‘राम तुम्हारे अनंत..
हिन्दी राइटर्स गिल्ड कैनेडा द्वारा रामनवमी के पावन अवसर पर ‘राम तुम्हारे अनंत आयाम’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया।…
आगे पढ़ेंसाहित्य जगत - भारत
डॉ. रमा द्विवेदी ‘साहित्य अर्चन मंच' द्वारा पुरस्कृत
साहित्य अर्चन मंच, नागपुर द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सम्मान समारोह 8 नवम्बर-2025 विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मलेन के सभागार में संपन्न…
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डॉ. रमा द्विवेदी ‘देवेंद्र शर्मा स्मृति मुंशी प्रेमचंद..
युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच का 12वाँ अखिल भारतीय साहित्योत्सव 2 नवम्बर 2025 पब्लिक लाइब्रेरी, दिल्ली के गीतांजलि सभागार में…
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‘प्रोफेसर पूरन चंद टंडन अनुवाद साहित्यश्री पुरस्कार’ से..
दिनेश कुमार माली की ‘दिग्गज साहित्यकारों से सारस्वत आलाप‘ एवं ‘शहीद बीका नाएक की खोज‘ पुस्तकों का हुआ विमोचन …
आगे पढ़ेंसाहित्य जगत - भारत
‘क से कविता’ का बाल-कविता समारोह संपन्न
बाल-दिवस-विशेष: हैदराबाद, 13 नवंबर, 2025। हिंदी-उर्दू कविता को नई पीढ़ी में लोकप्रिय बनाने के लिए समर्पित संस्था “क से कविता”…
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पुस्तकों द्वारा स्वस्थ समाज का निर्माण—इंदिरा मोहन
नई दिल्ली। “साहित्य सदैव मनुष्य को संस्कार देता आया है, उसे सही मार्ग दिखाता आया है। वास्तव में पुस्तकों…
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कुछ राब्ता है तुमसे—राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न
हैदराबाद, 8 अक्टूबर, 2025। मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी के गच्ची बावली स्थित दूरस्थ एवं ऑनलाइन शिक्षा केंद्र के…
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