संपादकीय - ऊर्जा और प्रेरणा
साहित्य कुञ्ज के इस अंक में
कहानियाँ
अमावस का अँधेरा
परिस्थितियाँ कुछ ऐसी थीं कि सुरेश और सुनीता की पीठ मेरी ओर थी। मेरे अचानक आने से वे अनजान थे। मैं ख़ुद को लगभग घसीटता हुआ ड्राइंगरूम तक ले गया और सोफ़े पर ढह-सा गया। दिमाग़ में तरह-तरह आगे पढ़ें
ऑनलाइन उपस्थिति
विद्यालय में नई व्यवस्था लागू हुई। अब विद्यार्थियों की उपस्थिति मोबाइल ऐप से दर्ज होने लगी। प्रधानाचार्य ने घोषणा की, “अब सब कुछ डिजिटल होगा। कोई भी विद्यार्थी अनुपस्थित नहीं छिप सकेगा।” कक्षा में अध्यापक ने मोबाइल खोला और आगे पढ़ें
गप्पू बंदर की वैज्ञानिक जिज्ञासा: गुरुत्वाकर्षण की खोज
जंगल में एक दिन बड़ा ही रोचक कार्यक्रम आयोजित किया गया। जंगल के सभी जानवर उत्साह से भरे हुए थे। मंच सजा था, रंग-बिरंगी पताकाएँ लहरा रही थीं और चारों ओर ख़ुशियों का माहौल था। आज 'जंगल रत्न विज्ञान आगे पढ़ें
जादूगर मोबाइल
एक था राजू। वह शहर में रहता था। राजू की दादी उसे रोज़ नई-नई कहानियाँ सुनाया करती थीं। उन कहानियों में जादूगर और जादुई छड़ी की कथाएँ भी होती थीं। राजू सोचता कि काश, मैं भी जादूगर होता तो आगे पढ़ें
टूटती, सँवरतीं औरतें
“मम्मी, मैं कॉलेज जा रही हूँ।” प्रतिदिन की भाँति ख़ुशी से चहकती मेरी बेटी मीरा बाहर निकली, गैरेज से अपनी स्कूटी निकाली और फुर्र करती हुई बाहर निकल गयी। उसे जाते देख मैं मुस्कुरा पड़ी। मेरे दो बच्चे हैं। आगे पढ़ें
दुहाई-तहाई
“धर्मवीर,” अपनी अर्द्धचेतना में जाई मुझे ठीक पहचान न पाईं। समझीं, मैं यशवीर नहीं हूँ। धर्मवीर हूँ। “हूँ,” मैंने उनका भ्रम न तोड़ा और भैया के अंदाज़ में हुंकार भरा। यों भी अपने इस चौदहवें साल तक आते-आते जैसे आगे पढ़ें
दो टेलीफ़ोन की परस्पर वार्तालाप
एक साधारण सा मोबाइल फ़ोन व एक नया क़ीमती मोबाइल फ़ोन अपने-अपने मालिकों की हड़बड़ाहट के कारण अनजाने में उनकी जेब से एक रेलवे-प्लेटफ़ॉर्म पर गिर गये। सौभाग्य से किन्हीं ईमानदार व्यक्तियों द्वारा पाये जाने पर वे दोनों वहाँ आगे पढ़ें
धक्के का मेहमान
उसने सोचा था—जिन रिश्तेदारों के घर शादी है, एक रात उन्हीं के घर रहकर, अगले दिन वापस काम पर आ जाऊँगा। घर जाना मुश्किल था, क्योंकि छुट्टी नहीं थी। उन रिश्तेदारों को लगा कि डोली जाने के बाद भी आगे पढ़ें
परफ़ेक्ट पोज़
शहर के सबसे बड़े मॉल के प्रवेश द्वार पर सेल्फ़ी पॉइंट बना था। चकाचौंध रोशनी के बीच लोग मुस्कुराते हुए अपनी तस्वीरें खींच रहे थे। वहाँ खड़े दरबान, किशन सिंह की वर्दी इस्तरी की हुई कड़क थी, पर उसकी आगे पढ़ें
पुरानी मेज़
कार्यालय में नई काँच की मेज़ रखी गई थी। चमकदार, पारदर्शी, आधुनिक। सभी कर्मचारी उसे कौतूहल से देख रहे थे। प्रबंधक ने गर्व से कहा, “अब हमारा कार्यालय भी आधुनिक दिखेगा।” पुरानी लकड़ी की मेज़ को कोने में हटा आगे पढ़ें
प्रमाण-पत्र
अजय मेहता तीन साल से उसी दफ़्तर में था जहाँ रमाकांत वर्मा क्लर्क था। रमाकांत की फ़ाइलें हमेशा अजय की मेज़ से होकर गुज़रती थीं—और हमेशा देरी से। एक दिन अजय ने धीरे से कहा, “रमाकांतजी, यह फ़ाइल दस आगे पढ़ें
प्रेम का प्रतिदान
गाँव की सुबह किसी काव्य-पंक्ति की तरह मृदुल और सुव्यवस्थित नहीं होती थी; वह श्रम और आवश्यकता की ठोस आहटों से खुलती थी। पूर्व दिशा में हल्की लालिमा फैलते ही हर घर में हरकत शुरू हो जाती। कुएँ पर आगे पढ़ें
फेंकी हुई रोटियाँ
अमलतास के पीले फूलों से ढकी सड़क पर सन्नाटा पसरा था। महल्ले के ऊँचे रुसूख़ वाले सफ़ेद बँगले के बाहर कूड़ेदान लबालब भरा था। रम्मू अपनी फटी बसंती कमीज़ की आस्तीन चढ़ाए, उस ढेर में से प्लास्टिक की बोतलें आगे पढ़ें
ब्रेन ड्रेन
दिल्ली के केंद्रीय सचिवालय के पास एक सरकारी दफ़्तर। सुबह के नौ बजे। अजय अग्निहोत्री अपनी कुर्सी पर बैठकर फ़ाइलें देख रहा था। तीस साल का, दुबला-पतला, साफ़-सुथरे कपड़े। आँखों पर पतला चश्मा। मेज़ पर फ़ाइलों का ढेर, पर आगे पढ़ें
मुफ़्त की सरकार
चुनाव से तीन महीने पहले नेताजी का ट्रक गाँव में आया। उस पर लिखा था—“जनता का हक़, मुफ़्त में मिलेगा।” साइकिल बँटी, मोबाइल बँटे, गैस सिलेंडर बँटे। गाँव ख़ुश था। बुज़ुर्ग रामजतन बाहर नहीं आए। पोते ने पूछा, “दादा, आगे पढ़ें
सिर्फ़ दस बजे
वे सुबह आठ बजने से पहले दुकान पर पहुँच गए थे। बिना कमर सीधी किए, लगातार काम करते-करते रात के दस बज गए थे; क्योंकि लड़के कम थे काम ज़्यादा था। तभी लाला जी ने दुकान में प्रवेश किया। आगे पढ़ें
हास्य/व्यंग्य
अक्षय कुमार—बोतल का बादशाह, कंगना—सिलेंडर क्वीन
“सरजी . . . सरजी . . . एक सुपरहिट फ़िल्म का आइडिया आया है!” असिस्टेंट प्रोड्यूसर ने सीनियर प्रोड्यूसर के कान फट जाएँ इतनी ज़ोर से चिल्लाते हुए कहा। “क्या है? फिर से पाकिस्तान को तबाह करना है? आगे पढ़ें
अव्यवस्था: जो कभी नहीं बदलती, इसलिए सबसे भरोसेमंद है
[दिन नहीं बदलते, बस मुश्किलों के चेहरे बदलते हैं] [एक ऐसा सफ़र, जहाँ मंज़िल नहीं—बस चलते रहने की मजबूरी है] भारत में अब एक अनोखा उत्सव प्रचलन में है—“सामान्य अव्यवस्था दिवस।” यह हर दिन मनता है, अवकाश नहीं मिलता, आगे पढ़ें
चलो बुलावा आया है . . . दिल्ली ने बुलाया है!
नेता हो, लेखक हो या कलाकार—सबकी निगाहें आख़िरकार दिल्ली पर टिकती हैं। जैसे गली का आशिक़ बस एक इशारे का इंतज़ार करता है, वैसे ही ये सब अपने-अपने बोरिया-बिस्तर बाँधे तैयार बैठे रहते हैं। कोई रैली के बहाने, कोई धरने आगे पढ़ें
राजा सिंह की काम करने की पद्धति: ‘सिस्टम न बदलो, नाम बदलो।’
. जंगल में राजा सिंह ने नाम बदलने की भव्य परंपरा शुरू की थी। जंगल के नियमों से लेकर इमारतों तक के नाम बदले ही जा रहे थे, अब उन्होंने जंगल के क्षेत्रों के नाम बदलने की शुरूआत कर दी आगे पढ़ें
संपूर्ण समाधान
देश में स्टार्टअप की धूम मची हुई है। हर कोई स्टार्टअप कर रहा है। नौकरी का आकर्षण अब उतार पर है। हाल ही में एक इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भारत के राष्ट्रीय खेल हॉकी की टीम पदक जीत कर लौटी आगे पढ़ें
समाधि की नई विधि—स्क्रीन पर झुकी हुई गर्दन
[नोटिफिकेशन का युग: जहाँ प्रतिक्रिया ही साधना है] [मनुष्य का नया आश्रम: छह इंच की स्क्रीन की साधना] हमारे देश में महापुरुषों की परंपरा सदियों पुरानी रही है। कभी महात्मा बनने के लिए घर-द्वार छोड़कर जंगलों में तपस्या आगे पढ़ें
साठा सो पाठा और जेन-ज़ी
बूढ़े पत्नी-पीड़ित संघ में नई जवानी आई थी। हालाँकि हमने तो था लाख समझाया कि भाई लोगो अभी तो आप सभी अविवाहित हो। अपना कोई प्रेमिका-पीड़ित संघ बना लो। यार काहे हम ग़रीबों की छाती पे मूँग दलने के आगे पढ़ें
आलेख
1857 की क्रांति की अनसुनी आवाजः वीरांगना अवंतीबाई लोधी
(वीरांगना महारानी अवंतीबाई लोधी के 168वें बलिदान दिवस 20 मार्च 2026 पर विशेष) आज भी भारत की पवित्र भूमि ऐसे वीर-वीरांगनाओं की कहानियों से भरी पड़ी है जिन्होंने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर देश के आज़ाद आगे पढ़ें
कुछ संवाद, ख़ुद के साथ: 001
दुनियाँ की सबसे ख़ूबसूरत चीज़ों में से एक है, एक लेखक द्वारा किसी अन्य लेखक पर लिखी हुई कोई किताब। पढ़ते वक़्त ऐसा लगता है, मानों “दुनियाँ के सारे लेखकों में एक जैसा पागलपन है। जो उन्हें इस दुनियाँ आगे पढ़ें
नव संवत्सर: कालचक्र का नवोदय और चेतना का पुनर्जागरण
जब प्रकृति अपने नूतन शृंगार में मुस्कुराती है, जब वृक्षों की सूनी शाखाओं पर कोमल हरितिमा का प्रथम स्पर्श झलकता है, जब पवन में एक अनकहा उल्लास गूँजता है तभी भारतीय संस्कृति अपने नववर्ष का स्वागत करती है। यह आगे पढ़ें
पुष्पा मेहरा के हाइकु
प्रस्तुत है पुष्पा मेहरा जी के हाइकु। पुष्पा मेहरा दिल्ली की रहने वाली हैं। इनके ‘अपना राग’, ‘अनछुआ आकाश’ और ‘रेशा-रेशा’ तीन कविता-संग्रह प्रकाशित हुए हैं। इनका हाइकु-संग्रह ‘सागर मन’ भी प्रकाशित हुआ है । इसी संग्रह के पंद्रह आगे पढ़ें
बी. एल. गौड़ के उपन्यास ‘अक्सर लौटना नहीं होता’ में अभिव्यक्त विविध सांस्कृतिक आयाम
डॉ. शैलेश शुक्ला वैश्विक समूह संपादक सृजन संसार अंतरराष्ट्रीय पत्रिका समूह आशियाना, लखनऊ - 226012, उत्तर प्रदेश ईमेल पता : PoetShailesh@gmail.com सारांश प्रस्तुत शोध पत्र सुपरिचित कवि एवं कहानीकार डॉ. बी. एल. गौड़ के प्रथम उपन्यास ‘अक्सर लौटना नहीं आगे पढ़ें
भाषा का उद्भव और विकास: मानवीय चेतना की अभिव्यक्ति
भाषा केवल ध्वनियों का समूह नहीं, अपितु मानवीय संवेदना, संस्कृति और वैचारिक क्रांति की संवाहिता है। किसी भाषा का जन्म आकस्मिक नहीं होता, बल्कि यह युगों की साधना, सामाजिक अंतःक्रिया और भौगोलिक परिस्थितियों का प्रतिफल होती है। भाषा का आगे पढ़ें
मराठी दलित कविता और मानवाधिकार
-डॉ. शिराजोदीन अतिथि प्राध्यापक, हिंदी विभाग, सरकारी प्रथम श्रेणी महिला महाविद्यालय, बीदर। ईमेल: drshirajoddin@gmailcom शोधसार मराठी दलित कविता भारतीय दलित साहित्य की एक क्रांतिकारी धारा है, जो जातीय भेदभाव, सामाजिक शोषण, धार्मिक पाखंड और आर्थिक असमानता के विरुद्ध विद्रोह आगे पढ़ें
राम-राष्ट्र की जीवनधारा और शाश्वत चेतना का प्रवाह
(राम नवमी पर आलेख) जब भारतीय मानस अपनी गहराइयों में उतरता है, तो उसे वहाँ किसी एक व्यक्तित्व का ही नहीं, बल्कि एक सम्पूर्ण जीवनदर्शन का साक्षात्कार होता है। यह साक्षात्कार राम का है जो केवल अयोध्या के राजकुमार आगे पढ़ें
रामकथा का उद्भव और विकास: एक वस्तुगत ऐतिहासिक विश्लेषण
भारतीय सांस्कृतिक परंपरा में वाल्मीकि रामायण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक ऐतिहासिक-सांस्कृतिक प्रक्रिया का परिणाम है। राम का चरित्र और रामकथा की संरचना यह संकेत देती है कि यह आख्यान किसी एक समय, एक लेखक या आगे पढ़ें
शब्द-साधना के साधक: नंदीलाल ‘निराश’
हिंदी साहित्य की समृद्ध और बहुरंगी परंपरा में कुछ रचनाकार ऐसे होते हैं, जिनका व्यक्तित्व और कृतित्व मिलकर एक युग-संवेदना का निर्माण करते हैं। नंदीलाल ‘निराश’ ऐसे ही साहित्यकार थे, जिनकी लेखनी लोकजीवन की धड़कनों से अनुप्राणित थी। वे आगे पढ़ें
शैलेन्द्र चौहान की कविताएँ: समकालीन यथार्थ और जनपक्षधर काव्य-दृष्टि
समकालीन हिंदी कविता का परिदृश्य अनेक वैचारिक प्रवृत्तियों, सामाजिक सरोकारों और सौंदर्यबोध की विविधताओं से निर्मित है। बीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध से लेकर इक्कीसवीं सदी के प्रारंभिक दशकों तक हिंदी कविता ने जिस तरह सामाजिक यथार्थ, राजनीतिक विडंबनाओं और आगे पढ़ें
समकालीन भारतीय साहित्य में प्रो. मीन केतन प्रधान के ‘पिता’ की सार्वभौमिकता
प्रोफ़ेसर मीनकेतन प्रधान का नाम हिन्दी जगत में सर्व-परिचित है। उनका अद्यतन काव्य-संग्रह ‘पिता (100 कविताएँ) ’ (प्रकाशक: विश्व हिन्दी अधिष्ठान, रायगढ़, 2024, मूल्य ₹250, ISBN 978-93-6175-118-9) हिंदी काव्य की एक अनूठी कृति है। यह मात्र एक काव्य-संग्रह नहीं, आगे पढ़ें
हिंदी में प्रयोगवाद और अज्ञेय
हिंदी साहित्य के आधुनिक इतिहास में सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ का नाम अत्यंत आदर और गंभीरता के साथ स्मरण किया जाता है। वे उन साहित्यकारों में हैं जिन्होंने हिंदी साहित्य को केवल नई रचनाएँ ही नहीं दीं, बल्कि उसकी आगे पढ़ें
समीक्षा
और कितना संघर्ष
मन्नू की वह एक रात प्रदीप श्रीवास्तव द्वारा लिखा गया एक मनोवैज्ञानिक और मनोविश्लेषणत्मक उपन्यास है। बुद्ध ने भी कहा था कि किसी पुरुष के चरित्रहीन हुए बिना स्त्री चरित्रहीन नहीं हो सकती। प्रदीप जी ने अपने उपन्यास में इस आगे पढ़ें
खुरदुरे यथार्थ को बयाँ करता संग्रह ‘आईने से पूछो’
पुस्तक का नाम: आईने से पूछो ग़ज़लकार: डॉ. अविनाश भारती प्रकाशक: श्वेतवर्णा प्रकाशन, नई दिल्ली पृष्ठ: 104 मूल्य: ₹199 अविनाश भारती बिहार की वर्तमान पीढ़ी के जागरूक और प्रतिभाशाली ग़ज़लकार हैं। विश्वविद्यालय में अध्यापन के साथ-साथ अपनी सृजनात्मक गतिशीलता बनाए आगे पढ़ें
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फाग और लोक संस्कृति की तान से गूँजा शिवना साहित्य समागम
शब्दों का कुंभ: सीहोर में शिवना साहित्य समागम का भव्य आयोजन, देशभर के रचनाकारों का जमावड़ा पहले दिन सिद्धपुर सभामंडप में उद्घाटन के साथ शुरू हुआ दो दिवसीय साहित्योत्सव तीन सभागारों में 12 वैचारिक सत्र, पुस्तक लोकार्पण और सांस्कृतिक आगे पढ़ें
कविताएँ
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“मातृभाषा हमारे जीवन का आधार है, हिंदी के विकास में योगदान देनेवाले ग़ैर हिंदी भाषिक विद्वानों ने अपनी मातृभाषा का…
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मुकेश कुमार ऋषि वर्मा की कृति ‘उगता सूर्य’ का हुआ विमोचन
शाहगंज (आगरा)। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ने श्री चित्रगुप्त भगवान संस्था सभागार में अपना 56वाॅं प्रांतीय अधिवेशन व शैक्षिक…
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डॉ. देवेंद्र शर्मा का काव्य संग्रह ‘अनुभव के आखर’ लोकार्पित
हैदराबाद, 15 दिसंबर, 2025— अपने दौर के अंतरराष्ट्रीय स्तर के वनस्पति शास्त्र वैज्ञानिक व कवि स्व. डॉ. देवेंद्र शर्मा…
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