शिव वंदना

15-02-2026

शिव वंदना

डॉ. सुशील कुमार शर्मा (अंक: 293, फरवरी प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

त्रिनेत्र दीप दाहकं, तमोमलं विनाशकं!
प्रसन्न शंभुं नायकं, विभुं भय  विनाशकं!
विभूतिभूषिताङ्गकं, सदासुनन्द दायकम!
ॐकार,गुणाकरं ,त्रिलोकनाथ शंकरं!
नमामि शंभु  शंकरं ,नमामि पाद पंकजम!!
 
प्रभात राग मस्तकैः, सुधांशु ज्योति हस्तकैः!
विलासितं दिगन्तकैः, सदाशिवं सुपुष्टकैः!
श्मशानभस्मधारिणे, हिमालये विहारिणे! 
कपर्दि! पाप हारिणे! मदांध दैत्य मारिणे!
नमामि शंभु  शंकरं ,नमामि पाद पंकजम!!
 
नमामि गिरिजापतिं, उमाधवं दयापतिं!
विभुं वरप्रदायकं, सुधीशितं सुरेश्वरं!
प्रमथगण सुसेवितं, मनोहरं मनोहरं!
अघोर रूप शाश्वतं, कृपाकरं कलाधरं!
नमामि शंभु  शंकरं ,नमामि पाद पंकजम!!
 
नीलकण्ठ करालकं, हलाहलं सुशान्तकं!
प्रपन्नलोक रक्षकं, दयार्द्रचित्त धारकं!
कपालमाल भूषितं, त्रिशूलपाणि भीषणं!
अनादि नाथ शंकरं, समाधिधाम सुंदरं!
नमामि शंभु  शंकरं ,नमामि पाद पंकजम!!
 
कैलासशैलवासिनं, गिरिन्द्रकन्य मोदितं!
प्रमुदितप्रमथाधिपं, सुरासुरैर् नमस्कृतं!
चन्द्रशेखर शान्तिदं, जगत्पतिं महेश्वरं!
निनाद डमरू नर्तनं, पशुंपतिं फणिधरं! 
नमामि शंभु  शंकरं ,नमामि पाद पंकजम!!
 
पशुपतिं जगद्गुरुं, विभुं विरूपलोचनं!
सदानृत्यताण्डवं, प्रचण्डभूतमोचनं!
भवबन्धविच्छेदकं, कृपाकरं दिगम्बरं!
सदाशिवं सदोदितं, प्रकाशरूप भास्वरं!
नमामि शंभु  शंकरं ,नमामि पाद पंकजम!!
 
वेदवेद्य परात्परं, निराकार निरञ्जनं!
अनन्तरूपधारिणं, महाकालं भयापहं!
हृदम्बुजे विराजितं, समाधिस्थि सुन्दरं!
उमासहाय शाश्वतं, भयोभ्यम प्रणाशनं!
नमामि शंभु  शंकरं ,नमामि पाद पंकजम!!

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