डूबी डूबी डिंग डिंग 

01-05-2026

डूबी डूबी डिंग डिंग 

डॉ. सुशील कुमार शर्मा (अंक: 296, मई प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

डूबी डूबी डिंग डिंग, 
डूबी डूबी डिंग
घड़ी बज रही टिंग टिंग टिंग। 
नींद छोड़कर उठो सभी, 
दिन की है शुरूआत अभी। 
 
डूबी डूबी डिंग डिंग, 
डूबी डूबी डिंग
तुम भी प्यारे हो समथिंग। 
चमकें दाँत सुनहरे मोती
कपड़े पहनों कुर्ता धोती। 
 
डूबी डूबी डिंग डिंग, 
डूबी डूबी डिंग
दोस्त बनाओ पिंग पिंग पिंग। 
करो किताबों से याराना, 
हर दिन विद्यालय तुम जाना। 

डूबी डूबी डिंग डिंग, 
डूबी डूबी डिंग
खेलो कूदो झिंग झिंग झिंग। 
हँसी को बाँटो, प्रेम लुटाओ, 
सबके दिल में जगह बनाओ। 
 
डूबी डूबी डिंग डिंग, 
डूबी डूबी डिंग
अनुशासन के तुम हो किंग। 
काम समय पर है जो करता
जीवन में आगे वह बढ़ता। 
 
डूबी डूबी डिंग डिंग, 
डूबी डूबी डिंग
ख़ुशियों से भर जाए रिंग। 
नन्हे क़दम जब जहाँ चलें, 
सपनों के वहाँ फूल खिलें। 

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