गुरुकुल की हो साधना

15-06-2026

गुरुकुल की हो साधना

डॉ. सुशील कुमार शर्मा (अंक: 299, जून द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

दोहे

गुरुकुल की हो साधना, विज्ञानी का ज्ञान। 
दोनों मिलकर ही गढ़ें, भारत की पहचान॥
 
ज्ञान संग अनुभव जुड़े, जागे बुद्धि विवेक। 
नई सदी की राह में, संस्कृति का अभिषेक॥
 
युवा शक्ति के हाथ में, तकनीकें भरपूर। 
संस्कार से युवा जुड़े, हटे तमस की धूर॥
 
शिक्षा केवल नौकरी, का न बने आधार। 
जीवन जीने की कला, में शिक्षा विस्तार॥
 
कंप्यूटर के दौर में, डाटा की बारात। 
माटी भाषा लोक से, जुड़ने की हो बात॥
 
व्हाट्स ऐप के ज्ञान पर, तुम मत देना ध्यान। 
भ्रमित युवाओं को करे, इसका कूड़ा ज्ञान। 
 
अंक नहीं मेधा प्रथम, प्रतिभा का सम्मान। 
संवेदन की सोच से, ऊँचा हो इंसान॥
 
पुस्तक घर सूने पड़े, सब स्क्रीनों में व्यस्त। 
आभासी इस जाल में, युवा चेतना पस्त॥
 
घुटने पर बौद्धिक खड़े, गूगल के दरबार। 
मौलिक चिंतन खो रहा, नैतिकता आधार॥
 
नैतिकता की भूमि से, निकले नवल प्रकाश। 
ज्ञान और विज्ञान से, अंधकार का नाश॥
 
परंपराओं से मिलें, जीवन के शुभ मंत्र। 
वर्तमान के ज्ञान से, युवा बने बस यंत्र। 

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