तस्वीर

15-05-2026

तस्वीर

डॉ. सुशील कुमार शर्मा (अंक: 297, मई द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

अमित पाँच साल बाद विदेश से लौटा था। घर में उत्सव जैसा माहौल था। वह हर चीज़ की तस्वीरें ले रहा था नया मकान, नई कार, सजावट, रिश्तेदार। 

माँ सुबह से उसके लिए पकवान बना रही थी। बार-बार कहती, “बेटा, एक फोटो मेरे साथ भी खिंचवा ले।” 

अमित हँसकर टाल देता, “अरे माँ, तुम तो यहीं हो। पहले दोस्तों से मिल लूँ, फिर आराम से खिंचवाएँगे।” 

चार दिन बाद वह वापस चला गया। जाने से पहले भी जल्दी में माँ के साथ तस्वीर नहीं ले पाया। 

छह महीने बाद रात में फोन आया माँ नहीं रहीं। अमित भागा हुआ घर पहुँचा। 

ड्रॉइंगरूम में माँ की बड़ी सी तस्वीर टँगी थी, जिस पर फूलों की माला थी। वह देर तक उस तस्वीर को देखता रहा। मोबाइल खोला हज़ारों तस्वीरें थीं, पर माँ के साथ एक भी नहीं। 

उसकी पत्नी ने धीमे से कहा, “माँ हर दिन तुम्हारा इंतज़ार करती थीं।” 

अमित फूट पड़ा। उसे पहली बार समझ आया कि हम जीवन की सबसे अनमोल उपस्थिति को हमेशा फिर कभी के लिए टाल देते हैं। 

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