राम नवमी पर दोहे

15-04-2026

राम नवमी पर दोहे

डॉ. सुशील कुमार शर्मा (अंक: 295, अप्रैल द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

प्रकट हुए श्री राम जब, जागे अंतःप्राण। 
मर्यादा की ज्योति से, मिला जगत को त्राण। 
 
वनपथ त्यागे राज सुख, साधा सत्य विचार। 
जीवन मर्यादित हुआ, तप ही उज्ज्वल सार॥
 
सीता करुणा साक्षिणी, लक्ष्मण जाग्रत ध्यान। 
रेखा भीतर संयमित, बाहर दृढ़ आधान॥
 
राज्य नहीं भूखंड बस, नहीं नीति विस्तार। 
सेवा से परिपूर्ण हो, शासन का व्यवहार॥
 
समता मूलक राज्य ही, रामराज्य के प्राण। 
हर आँसू को न्याय है, हर जीवन को त्राण। 
 
लंकापति के गर्व से, ज्ञान हुआ अज्ञान। 
रामबाण से संतुलन, लंका ध्वंस विधान॥
 
युग बदले संदर्भ भी, किन्तु न बदले राम। 
जीवन के हर युद्ध में, जय देता प्रभु नाम॥
 
चमक दमक के बीच भी, स्मृति में हों श्री राम। 
प्रगति संग समृद्ध हो, जीवन के आयाम॥
 
अंतर में जब प्रश्न हों, विचलित मन का धाम। 
संवादों के मौन में, पथदर्शी श्रीराम॥
 
नवमी का यह पुण्य दिन, मिटे सकल अज्ञान। 
मर्यादामय आचरण, जीवन सुखद विहान॥

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