मुझे छोड़ कर मत जाओ

01-01-2020

मुझे छोड़ कर मत जाओ

डॉ. सुशील कुमार शर्मा

"ठीक है मैंने सारी दलीलें सुनीं। दोनों ओर के आरोप प्रत्यारोप सुने और समझे और मैं अब  इस केस का निर्णय सुनाता हूँ," जज ने बहुत गंभीरता से अजय और अनामिका की और देखते हुए कहा।

"आप दोनों विगत पाँच वर्ष से एक दूसरे से अलग रह रहे हैं और आप लोगों के बीच किसी भी प्रकार के पति पत्नी के सम्बन्ध नहीं हैं। और भविष्य में आप साथ रहना भी नहीं चाहते इस कारण कोर्ट आपसी सहमति के आधार पर इस तलाक़ को मंजूर करता है। लेकिन इसकी एक शर्त है कि आप दोनों को पूरे आठ दिन कोर्ट की निगरानी में एक दूसरे के कार्य करने होंगे। अजय घर के सारे कार्य करेंगे और अनामिका अजय के सारे कार्य। अगर आप दोनों सहमत हों तो आप के तलाक़ को मंजूरी दी जा सकती है। ध्यान रहे दोनों को आठ दिन एक दूसरे के काम पूर्ण निष्ठा और ईमानदारी से करने होंगे अन्यथा तलाक को मंजूरी नहीं मिलेगी," जज ने मुस्कुराते हुए दोनों की ओर देखा।

जज का निर्णय सुनकर एकबारगी दोनों अचकचा गए किन्तु आठ दिन की ही तो बात है सोच कर दोनों ने हामी भर दी। जज ने दो निष्पक्ष ऑब्ज़र्वर नियुक्त कर दोनों को अपने-अपने काम सँभालने का आदेश दे दिया।

सुबह जैसे ही पाँच बजे दोनों अपने कमरों से निकल कर अपने-अपने काम में लग गए। अजय ने उठ कर बच्चों को स्कूल के लिए तैयार किया। अनामिका उठकर ऑफ़िस के लिए तैयार होने लगी।

अजय नाश्ता लेकर अनामिका के पास आया, "लो नाश्ता कर लो। मुझे मालूम है वहाँ ऑफ़िस में टाइम ही नहीं रहता।"

अनामिका ने देखा अजय दुबला हो गया है, "बीमार हो क्या?"

"नहीं," अजय ने निरीह भाव से अनामिका को देखा।

अजय की आँखों में उठते प्रश्नों  को अनामिका ने पढ़ा किन्तु दोनों के अहंकारों ने संबंधों के बीच एक दीवार सी खींच दी थी।

आठ दिन के बाद एक दूसरे की भूमिका निभाते हुए दोनों को पता चला कि वो ख़ुद कितने ग़लत थे।

दोनों तरफ़ के परिवार वाले चाह रहे थे कि दोनों एक हो जाएँ; लेकिन वहीं पर बात रुकी थी कौन एक वाक्य कहे, "मुझे छोड़ कर मत जाओ।"

जज महोदय के कोर्ट में दोनों पेश हुए।

"हाँ तुम दोनों ने कोर्ट के आदेश का अक्षरशः पालन किया है अतः कोर्ट तुम दोनों का तलाक़. . ." जज साहब अपना वाक्य पूरा नहीं कर पाए तभी अनामिका के आँखों में आँसू बहने लगे।

अनामिका के आँसू को देख कर अजय फफक कर रो पड़ा, "प्लीज़ अन्नू मुझे छोड़ कर मत जाओ।"

अनामिका के आँसू अजय की छाती भिगो रहे थे।

जज साहब डायस पर बैठे मुस्कुरा रहे थे।

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