फागुन ने कहा

01-02-2020

फागुन ने कहा कुछ
टेसू के कान में।


शिशिर ने ओढ़ी  
बसंती रज़ाई है।
मकर के सूरज में  
ठण्ड क्यों बौराई है।
कलियाँ सब महक उठीं
लेकर अंगड़ाइयाँ।
मादल वसंत भीगीं  
प्रेम की रुबाइयाँ।


कुसुमित पलाश मन
डूबा अभिमान में।


लहरीला रेशम सा
मौसम उन्मादी।
स्मृतियों के आँगन में
मन है परिवादी।
शब्द बने शिलाखंड
भाव नीर झरना है।
मलिनाते सपनों में
रंग बसंत भरना है।


अवहेलित पुष्प मन
झुकें हैं सम्मान में।

0 Comments

Leave a Comment

लेखक की अन्य कृतियाँ

नवगीत
कहानी
कविता
बाल साहित्य कविता
सामाजिक आलेख
कविता-मुक्तक
दोहे
लघुकथा
किशोर साहित्य नाटक
किशोर साहित्य कविता
ग़ज़ल
साहित्यिक आलेख
ललित निबन्ध
विडियो
ऑडियो