गाँधी के सपनों से कितना दूर कितना पास भारत

01-10-2020

गाँधी के सपनों से कितना दूर कितना पास भारत

डॉ. सुशील कुमार शर्मा

(गाँधी जयंती पर विशेष )
 

महात्मा गाँधी का नाम जाति, धर्म, राज्यों और राष्ट्रों की सीमा को पार करता है और 21 वीं सदी की भविष्यवाणी की आवाज़ बनकर उभरा था। आधी सदी से अधिक समय पहले, गाँधी जी ने शांतिपूर्ण सक्रियता और समानता और न्याय को बढ़ावा देने के माध्यम से, स्वतंत्रता और शांति का संदेश लेकर अपने गाँवों के धूल भरे रास्तों पर चलकर एक विविध भूमि का एकीकरण किया। उनकी क्रांति, जिसने ब्रिटिश शासन के तीन शताब्दियों को समाप्त कर दिया, मार्टिन लूथर किंग जूनियर से नेल्सन मंडेला, दलाई लामा और आँग सान सू की पीढ़ी को उत्पीड़न और निराशा से अपने लोगों के लिए स्वतंत्रता की तलाश करने के लिए प्रेरित किया। निष्क्रिय प्रतिरोध के अपने अहिंसक दर्शन के लिए दुनिया भर में प्रतिष्ठित, गाँधी जी की विरासत अक्षुण्य है।


भारत पिछले कुछ दशकों में दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ते राष्ट्रों में से एक रहा है। भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका की तरह, एक समय ब्रिटिश शासन के अधीन था। गाँधी जी के आदर्शों पर चल कर हमारे पूर्वज अपने देश से ब्रिटिश शासन को बाहर निकालने और अपने राष्ट्र को स्वतंत्र बनाने में सफल रहे। आज, भारत सवा सौ करोड़ से अधिक जनसंख्या वाला संपन्न देश है, और विश्व राजनीतिक मामलों में एक प्रमुख खिलाड़ी है। हालाँकि, कुछ लोगों को आश्चर्य होता है कि क्या गाँधी का भारत के लिए सपना सच हो गया है?

भारत के लिए गाँधी जी का सपना देश में स्वराज लाने का रहा था जो किसी भी जाति या धार्मिक उद्देश्यों को मान्यता नहीं देता है। स्वराज जो सभी के लिए हो, जिसमें किसान, विकलांग, अंधे और मेहनतकश लाखों लोग शामिल हैं। गाँधी जी हर आँख से आँसू पोंछना चाहते थे। वह चाहते थे कि "हम भारत के लोग" हमारे देश के लिए शांति के वाहक के रूप में कार्य करें और हमें अपने देश के लिए अंतिम साँस तक संघर्ष करें।

नए भारत के संस्थापक के रूप में, गाँधी जी ने हमें स्वतंत्रता-पूर्व संघर्ष की विरासत छोड़ी है, जिसे हम सभी सँजोये हैं और अभी भी देश भर में हममें से कई लोगों के लिए यह विरासत प्रेरणा का काम करती हैं। सत्य, सादगी, ज़रूरतमंदों की देखभाल और अहिंसा पर उनका अटूट विश्वास था। ग़रीबों और बेसहारा वर्ग के लिए काम करने की अदम्य इच्छा को फलीभूत करना ही गाँधीजी का अंतिम लक्ष्य था। राष्ट्रपिता ने विकास के मुद्दों पर भी अपनी अमिट छाप छोड़ी। उनके द्वारा दी गई वार्ता और उनके द्वारा लिखे गए लेख उन मुद्दों को आवाज़ देते हैं जो आज नए भारत के विकास के लिए ज़रूरी हैं। आज़ादी से महात्मा गाँधी का अर्थ केवल अंग्रेज़ी शासन से मुक्ति का नहीं था बल्कि वह ग़रीबी, निरक्षरता और अस्पृश्यता जैसी बुराइयों और कुरीतियों से मुक्ति का सपना देखते थे। वह चाहते थे कि देश के सारे नागरिक समान रूप से स्वाधीनता और समृद्धि के सुख भोगें। वह केवल राजनीतिक स्वतंत्रता ही नहीं चाहते थे, अपितु जनता की आर्थिक, सामाजिक और आत्मिक उन्नति भी चाहते थे। इसी भावना ने उन्हें ‘ग्राम उद्योग संघ’, ‘तालीमी संघ’ और ‘गो रक्षा संघ’ स्थापित करने के लिए प्रेरित किया।

गाँधी जी ने समाज में व्याप्त शोषण की नीति को ख़त्म करने के लिए भूमि एवं पूँजी का समाजीकरण न करते हुए आर्थिक क्षेत्र में विकेंद्रीकरण को महत्व दिया। उनकी विचारों में लघु एवं कुटीर उद्योग से ही देश की सही उन्नति हो सकती है।

गाँधी ने नए भारत के लिए काम करने का सपना देखना शुरू कर दिया था, वह सपना जो समृद्ध हो भी सकता है और नहीं भी हो सकता है, जो शक्तिशाली हो सकता है या नहीं भी हो सकता है, लेकिन जो उचित और न्यायसंगत अवश्य हो वह सपना जो भारत के शोषित और ग़रीबों के लिए एक नए सुबह के रूप में उदित हो। गाँधीजी सत्य से सीखने में विश्वास करते थे। सत्य ने ही गांधीजी को महानता दी,सत्य ने ही उन्हें संघर्ष का रास्ता सुझाया और सत्य ने ही उन्हें अपने भारत से कभी दूर नहीं होने दिया। वह अक़्सर कहते थे "शांति का रास्ता सच्चाई का रास्ता है"।

गाँधी जी जिन दो बुरी प्रथाओं से ज़िंदगी भर लड़ते रहे वो हैं –

1 अस्पृश्यता और जातिवाद: अस्पृश्यता जिससे दलित और हरिजन प्रभावित थे। हिंदू समाज की सबसे गंभीर समस्या थी। इन जातियों से संबंध रखने वाले लोगों के साथ बहुत बुरा व्यवहार किया जाता था और उन्हें उच्च वर्ग के द्वारा भी प्रताड़ित किया जाता था।

2. बाल विवाह: यह भारतीय समाज की सबसे महत्वपूर्ण समस्या में से एक थी क्योंकि लड़कियों को शिक्षा से रहित कर दिया जाता था और 8-9 वर्ष की आयु में उनकी शादी कर दी जाती थी।

गाँधी जी ने नए भारत के लिए कुछ सपने देखे थे जिनका सार संक्षेप निम्न बिंदुओं में हैं।

1. गाँधी जी चाहते थे कि भारत में न उच्च वर्ग के लोग और न ही निम्न वर्ग के लोग हों बल्कि समाज में समानता हो।
2 . समाज में महिलाओं के लिए भी वही सम्मान हो जो पुरुषों के लिए सुरक्षित है। एवं महिलाओं के हरवर्ग को शिक्षा की सुविधा हो।
3. जहाँ कोई अस्पृश्यता नहीं होगी और सभी धर्मों के लिए समान सम्मान होगा।
4 . सभी गर्व से, ख़ुशी से और स्वेच्छा देश निर्माण के लिए श्रमसाध्य हों।
5 . सभी नागरिकों के हृदय में राष्ट्र के लिए अदम्य आत्म-बलिदान का संकल्प हो।
6 . उनका मानना था कि भारत की नियति शांति के साथ है जो एक सरल और ईश्वरीय जीवन से आती है।
7 . भारत के नवनिर्माण के लिए शुद्ध संकल्प और लक्ष्य निर्धारित हों। 
8 . गर्मी उद्योगों और कुटीर उद्योगों पर आधारित अर्थव्यवस्था हो।
9 . नया भारत आत्म निर्भर और स्वदेशी संकल्पना पर आधारित हो।
10. भारत के हर नागरिक को शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधा प्राप्त हो।
11. स्वच्छता में ही ईश्वरीय वास है।

अब प्रश्न उठता है आधुनिक भारत गाँधी के सपने के भारत से कितना दूर कितना पास है।

सूचना प्रौद्योगिकी ने गाँधी के आधुनिक भारत के सपने को पूरा करने में एक बड़ा प्रभाव डाला है। स्वच्छ भारत अभियान,राष्ट्रीय ई-शासन योजना (NeGP):जनधन योजना, ग़ैर-सरकारी संगठनों द्वारा दी जाने वाली मुफ़्त मदद में वृद्धि, अंतरिक्ष में भारत का दख़ल, सामरिक रण नीतियाँ, आई टी क्षेत्र में प्रगति ये सभी गाँधी के आधुनिक भारत के सपने को पूरा करने में लगे हुए हैं लेकिन राजनैतिक भ्रष्टाचार, बिकता हुआ लोकतंत्र, संसद की उदासीनता, बढ़ती बेरोज़गारी, सीमापार आतंक, गिरता हुआ सकल घरेलू उत्पाद (GDP) ये गाँधी के सपने के भारत के रास्ते की रुकावटें हैं जिन्हें हर हाल में दूर करना होगा।

आर्थिक दृष्टिकोण से, गाँधीजी ने अपने आर्थिक आधार पर गाँव के साथ एक जीवंत राष्ट्र का सपना देखा। हालाँकि, आज़ादी के बाद से, भारत विकास के एक अलग रास्ते पर चल पड़ा है। यह सब 1990 के दशक तक विनिर्माण और खनन उद्योगों के माध्यम से औद्योगिक विकास पर ध्यान केंद्रित करने के साथ शुरू हुआ और इसके बाद 2000 के दशक के आईटी और तकनीकी बूम के बाद सेवा क्षेत्र में तेज़ी आई। भारत अब एक वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में माना जाता है, कृषि, उत्पन्न रोज़गार के मामले में भारत सबसे बड़ा क्षेत्र है, और इस क्षेत्र में प्रगति निरंतर जारी है। प्रगति और परंपरा के बीच संतुलन का एक सादृश्य हासिल करना भारत के लिए महत्वपूर्ण है। भारत, अपने बेलगाम प्राकृतिक संसाधनों और अच्छी तरह से स्थापित कृषि सेटअप के साथ, आत्मनिर्भरता प्राप्त कर सकता है जो कि अधिकांश देश केवल सपना देख सकते हैं। जिसका सपना गाँधीजी ने देखा था।

1947 में, भारत ब्रिटिश साम्राज्य से स्वतंत्रता प्राप्त करने में सफल हुआ लेकिन छह महीने से भी कम समय बाद गाँधी की हत्या कर दी जाएगी। यद्यपि उनकी विरासत, नागरिक अधिकारों के कार्यकर्ताओं और दुनिया भर में स्वतंत्रता आंदोलनों को प्रेरित करेगी। 'गांधी का उदाहरण वैश्विक मंच पर मौलिक रहा है।‘ मार्टिन लूथर किंग ने अमेरिका में नागरिक अधिकारों के आंदोलन की अगुवाई के लिए गाँधी को अपनी प्रेरणा के रूप में इस्तेमाल किया और नेल्सन मंडेला गांधी से इतना प्रेरित थे कि दक्षिण अफ़्रीका आज गाँधी को अपने संस्थापकों में से एक मानता है। हालाँकि, कुछ के लिए, गाँधी के सिद्धांत उपमहाद्वीप में उन कुछ चुनौतियों के जवाब में फिर से जागृत हो रहे हैं, जिनके बारे में गाँधी ने लगभग 90 साल पहले कहा था: भारतीय समाज में गाँधी की विरासत एक बार फिर स्पष्ट हो रही है सम्पूर्ण विश्व में विभिन्न पक्षों के राजनेता गाँधी की विरासत के संरक्षक बनने के लिए संघर्ष करते हैं, गाँधीवाद का आदर्शवाद भारत में फिर से गूँज रहा है, भले ही कई बार, ऐसा लगता है की हम गाँधी के सिद्धांतों को भूलते जा रहें हैं। 

मार्टिन लूथर किंग और मंडेला को प्रेरित करने के बावजूद, क्या गाँधी आधुनिक भारत को भी प्रेरित करते हैं यह एक बड़ा यक्ष प्रश्न है? तुषार गाँधी के अनुसार: भारत ने गाँधीवादी विचारधारा को ऐसे समय में त्याग दिया है जब हमारी मानव प्रजातियों के अस्तित्व पर ख़तरा मंडरा रहा है।

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