सीता का संत्रास

15-10-2019

सीता का संत्रास

सुशील कुमार शर्मा

बहुत सहे हैं दुःख मैंने कुछ तुमको सहने होंगे।
कुछ प्रश्नों के उत्तर श्री राम तुम्हें अब देने होंगे।

 

तोड़ धनुष शिव को जब तुमने मुझसे ब्याह रचाया था।
राजनंदनी बनने का सुख मैंने उस क्षण पाया था।
हम सब बहनें रानी बन कर जब कौसलपुर आईं थीं।
हमने अपने आँचल में वो सारी ख़ुशियाँ पाईं थीं।
नहीं कभी थी राजलालसा न मन में अभिलाषा थी।
माँग राम सिन्दूर सजाने की मन में बस आशा थी।

 

कब सोचा था माँ कैकई के नश्तर अब सहने होंगें।
कुछ प्रश्नों के उत्तर श्री राम तुम्हें अब देने होंगे।

 

राजा दशरथ बाध्य हुए क्यों कैकई के अरमानों से।
क्यों कौशल्या चुप बैठीं थीं अंतःपुर अफ़सानों से।
माना रघुवंशों के जीवन में वचन मान सबकुछ होता।
माना रघुवंशों के मन में प्रण प्राण बना सदा सोता।
नई नवेली दुल्हन आईं थीं कुछ अपने अरमान लिए।
कुछ खोने कुछ पाने कुछ अपनी पहचान लिए।

 

हा! किसे पता उनको ये विरह बाण सहने होंगें।
कुछ प्रश्नों के उत्तर श्री राम तुम्हें अब देने होंगे।

 

राम अकेले वन को जाएँ और सीता भोगे राजविलास
ये कैसा निर्णय था प्रियवर रखो भी न तुम मुझको पास
जीवन भर हम साथ रहेंगे जब ये वचन दिया था गर।
मुझे छोड़ कर जाने का क्यों निर्णय लिया गया था फिर।
क्या तुम बिन सीता कौसल के अंतःपुर में रह पाती।
क्या दुनिया के तानों को वो जीवन में सह पाती।

 

कितनी आतुरता से सीता ने वल्क वस्त्र पहने होंगे।
कुछ प्रश्नों के उत्तर श्री राम तुम्हें अब देने होंगे।

 

किंचित मात्र न सोचा मन में मेरी क्या हालत होगी।
जो भोगेंगे राम कष्ट वो सीता की पीड़ा होगी।
आज अयोध्या सूनी सूनी आज अवधपुर खाली है।
इस उपवन को छोड़ चला अब देखो उसका माली है।
कर्तव्यों के कंटक पथ पर राम संग चली सीता।
मुस्काती अनुगामित बन कर चली भाग्य छली सीता।

 

अधरों पर मुस्कानों के संग पीड़ा के गहने होंगे।
कुछ प्रश्नों के उत्तर श्री राम तुम्हें अब देने होंगे।


स्वर्ण हिरण वो ज़िद थी मेरी वो तुमको लाना होगा
किसे पता था लाँघ लक्ष्मण रेखा सीता को जाना होगा।
स्त्री सुलभ उस आशा को काश रोक दिया तुमने होता।
तत्क्षण लोभ की भाषा को काश टोक दिया तुमने होता।
शूपर्णखा की नाक काटना रावण का प्रतिशोध बना
स्त्री का अपमान बन गया देखो कितना रक्त सना।

 

सीता हो या शूपर्णखा दर्द उसे सब सहने होंगे।
कुछ प्रश्नों के उत्तर श्री राम तुम्हें अब देने होंगे।

 

एक नागरिक की मंशा ने मन पर क्यों आघात किया?
अपनी प्रिय पवित्र सीता पर तुमने फिर क्यों घात किया?
क्यों मेरे चरित्र पर तुमने आज गड़ा ये शूल दिया?
बेसिर पैर की बातों को क्यों इतना ज्यादा तूल दिया?
एक गर्भिणी माता को तुमने फिर वनवास दिया।
पूर्ण समर्पण के बदले में तुमने ये अविश्वास दिया।

 

क्या तुम उत्तर दोगे प्रियवर प्रश्न मेरे कुछ पैने होंगे!
कुछ प्रश्नों के उत्तर श्री राम तुम्हें अब देने होंगे।

 

लव कुश जैसे सुतों की माता राम की मैं अनुगामनी।
सत्य शपथ है राम तुम्हारी मैं गंगा सी पावनी।
स्त्री जीवन कठिन तपस्या अपमानों को सहती है।
कर्तव्यों के पथ पर चल कर अविरल निर्मल बहती है।
कर्तव्यों की बलिवेदी पर बीज सुखों के बोना है।
हे धरती माँ गोद तुम्हारी सीता सुता को सोना है।

 

सीता के संग सुख के पल श्री राम तुम्हें खोने होंगे।
कुछ प्रश्नों के उत्तर श्री राम तुम्हें अब देने होंगे।

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