जंगल बुक -3 गाँधी जयंती समारोह

01-10-2019

जंगल बुक -3 गाँधी जयंती समारोह

सुशील कुमार शर्मा

पात्र - घोड़ा, हाथी, शेर, चीता, तोता, जिराफ, सियार,कोयल

तोता

शेर महोदय दो अक्टूबर को गाँधी जयंती है जंगल में कुछ प्रोग्राम किया जाए ताकि हम सबको गाँधी जी की विचारधारा से परिचित करा सकें।

शेर

मैं भी सोच रहा था कुछ प्रेरणात्मक कार्य किया जाए।

हाथी

सही है सिर्फ़ गाँधी जी की तस्वीर पर माल्यार्पण से कुछ नहीं होगा।

जिराफ

न ही लम्बे-लम्बे भाषणों से कुछ होगा।

चीता

सही है गाँधी जी हमेशा दिखावे के विरोध में रहे हैं और आजकल हम सब दिखावे में ही लगे हैं।

सियार

आप लोगों ने कुछ सोचा क्या किया जाय।

तोता

हमें समाज में जागृति लानी है जिससे समाज से कुरीतियों का ख़ात्मा हो।

शेर

समाज में बहुत सारी कुरीतियाँ हैं एक साथ सबको ख़त्म नहीं किया जा सकता।

हाथी

सही है हमें वर्तमान की जो सबसे बड़ी कुरीति है अस्वच्छता और गंदगी उसको प्राथमिकता देनी होगी।

तोता

आपकी बात उचित है हाथी दादा हमें सबसे पहले गंदगी, अस्वच्छता और प्लास्टिक पॉलिथीन के प्रयोग इन तीन बातों की जागृति समाज में जगानी है।

चीता

लेकिन दो अक्टूबर को हमारा प्लान ऑफ़ एक्शन क्या होगा।

शेर

इस मामले की ज़िम्मेदारी तो सियार जैसे चतुर जानवर की है वो हो बताएँ हमें ऐसा क्या करना चाहिए जिससे समाज प्रेरित होकर इन कुरीतियों को त्यागे।

जिराफ

मेरा सुझाव है कि किसी भी सूचना को प्रेषित करने में बच्चों की अहम भूमिका होती है अतः हम हमारे जंगल के सभी बच्चों को अपने अभियान में शामिल करें और उनमें इन बातों के प्रति जागरूकता उत्पन्न करें।

सियार

बहुत सही जिराफ भाई (हँसते हुए) लम्बी गर्दन में से बुद्धि का सही प्रवाह हो रहा है।

 

(दो अक्टूबर को एक विशाल आमसभा का आयोजन किया गया जिसमें सभी ने गंदगी, अस्वच्छता और प्लास्टिक के दुष्परिणामों पर अपने-अपने विचार प्रकट किये।)

 

तोता

माननीय शेर महोदय जी, आदरणीय हाथी दादा, इस जंगल के सभी रहवासी और प्यारे बच्चो, आज हम राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की 150वीं जयंती मनाने जा रहें हैं, गाँधी जी ने हमेशा अस्पृश्यता और गंदगी को मानव जीवन का सबसे बड़ा शत्रु माना था वर्तमान में एक और शत्रु इनसे मिल गया है और वो है प्लास्टिक का उपयोग; आज इस अवसर पर हम इन्हीं तीन बिंदुओं पर चर्चा करेंगे सर्वप्रथम में श्री सियार महोदय को आमंत्रित करता हूँ।

सियार

सभी का यथायोग्य अभिवादन करके मैं राष्ट्रपिता को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ और आज मैं प्लास्टिक के दुष्प्रभावों पर अपने विचार व्यक्त करना चाहता हूँ।

पॉलिथीन का बढ़ता हुआ उपयोग न केवल वर्तमान के लिये बल्कि भविष्य के लिये भी ख़तरनाक होता जा रहा है। पॉलिथीन पूरे देश की गम्भीर समस्या है।

प्लास्टिक का प्रयोग हमारे जीवन में सर्वाधिक होने लगा है। इसका प्रयोग नुक़सानदायक है यह जानते हुए भी हम धड़ल्ले से इनका इस्तेमाल कर रहे हैं। यदि इसके प्रयोग पर रोक लगे तो बात बने। प्लास्टिक को जलाने से भी नुक़सान होगा। इसका ज़हरीला धुआँ स्वास्थ्य के लिये ख़तरनाक है। प्लास्टिक की कुछ थैलियों, जिनमें बचा हुआ खाना पड़ा होता है, अथवा जो अन्य प्रकार के कचरे में जाकर गड-मड हो जाती हैं, उन्हें प्राय: पशु अपना आहार बना लेते हैं, जिसके नतीजे नुक़सान दायक हो सकते हैं। चूँकि प्लास्टिक एक ऐसा पदार्थ है जो सहज रूप से मिट्टी में घुल-मिल नहीं सकता और स्वभाव से अप्रभावनीय होता है। उसे यदि मिट्टी में छोड़ दिया जाए तो भूगर्भीय जल की रिचार्जिंग को रोक सकता है। प्लास्टिक कचरे का दोबारा उत्पादन आसानी से संभव नहीं होता है। क्योंकि इनके जलाने से जहाँ ज़हरीली गैस निकलती है, वहीं यह मिट्टी में पहुँच भूमि की उर्वरा-शक्ति नष्ट करता है। दुकानों पर चाय प्लास्टिक की पन्नियों में मँगा रहे हैं। गर्म चाय पन्नी में डालने से पन्नी का केमिकल चाय में चला जाता है, जो बाद में लोगों के शरीर में प्रवेश कर जाता है। इससे कैंसर का ख़तरा बढ़ जाता है। प्लास्टिक थैलियों के विकल्प के रूप में जूट और कपड़े से बनी थैलियों और कागज की थैलियों को लोकप्रिय बनाया जाना चाहिए और इसके लिए कुछ वित्तीय प्रोत्साहन भी दिया जाना चाहिए। आदर्श रूप से, केवल धरती में घुलनशील प्लास्टिक थैलियों का उपयोग ही किया जाना चाहिये। जैविक दृष्टि से घुलनशील प्लास्टिक के विकास के लिये अनुसंधान कार्य जारी है। मैं आप सभी से करबद्ध निवेदन करता हूँ की हम सभी आज से ही पॉलीथिन और प्लास्टिक का उपयोग पूर्णतः बंद करदें। धन्यवाद। 

तोता

आदरणीय सियार जी ने बहुत सारगर्भित उद्बोधन दिया अब मैं आदरणीय हाथी दादा को आमंत्रित कर रहा हूँ वो इस संदर्भ में अपना मंतव्य प्रकट करें।

हाथी

सभी का यथायोग्य अभिवादन उपरांत मैं राष्ट्रपिता को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ अभी सियार महोदय ने प्लास्टिक के दुष्परिणाम और उसके विकल्प के बारे में सारगर्भित विचार रखे मैं इससे आगे अस्वच्छता पर अपने विचार रखना चाहता हूँ।

गांधी जी ने “स्वच्छ भारत” का सपना देखा था जिसके लिए वह चाहते थे कि भारत के सभी नागरिक एक साथ मिलकर देश को स्वच्छ बनाने के लिए कार्य करें और इस सपने को साकार बनायें। स्वच्छता मानव समाज की जीवन रेखा है। गाँधी जी ने अपने भाषण में कहा था कि स्वतंत्रता और स्वच्छ्ता में से मुझे किसी एक को चुनना पड़े तो मैं सर्व प्रथम स्वच्छता को ही चुनूँगा। स्वच्छता का दायरा इतना विस्तृत है कि इसे अमल में लाने के लिए कई स्तरों पर विचार करने की आवश्यकता है। मन, वाणी, कर्म, शरीर, हृदय, चित्त, समाज, परिवार, संस्कृति और व्यवहार से लेकर धर्म और विज्ञान तक में स्वच्छता का विशेष महत्व है। या कहें, बिना स्वच्छता के जीवन, परिवार, समाज, संस्कृति, राष्ट्र, विश्व और चेतना के उच्च आदर्श को प्राप्त करना असंभव है। साफ़-सफ़ाई केवल सफ़ाई कर्मचारियों की ही ज़िम्मेदारी नहीं है, यह हम सभी नागरिकों की ज़िम्मेदारी है कि हम अपने शहर और गाँवों को साफ़ और सुरक्षित रखें। हमें यह नज़रिया बदलना होगा और मैं जानता हूँ कि इसे केवल एक अभियान बनाने से कुछ नहीं होगा। पुरानी आदतों को बदलने में समय लगेगा लेकिन यह इतना मुश्किल काम भी नहीं है। इस अभियान के जरिये “2019 में महात्मा गाँधी की 150वीं जयंती के अवसर पर भारत उन्हें स्वच्छ भारत के रूप में सर्वश्रेष्ठ श्रद्धांजलि दे सकें”। धन्यवाद!

तोता

आदरणीय हाथी दादा ने स्वछता पर अपने सारगर्भित विचार रखे हमें अपने वातावरण और पर्यावरण को स्वच्छ बनाने के लिए क्या करना चाहिए इस सन्दर्भ में आज इस समारोह के मुख्य अतिथि श्री शेर सिंह अपना उद्बोधन देंगे।

शेर

आज इस शुभ अवसर पर मेरे जंगल के सभी निवासियों को शुभकामनायें प्रेषित हैं साथ ही पूजनीय बापू की 150वीं जयंती पर मेरी और से उन्हें श्रद्धा-सुमन अर्पित हैं।

आज मैं स्वच्छता अभियान और प्लास्टिक के प्रयोग पर अपने विचार प्रकट करना चाहता हूँ। विश्व में जिन 2.5 अरब लोगों के पास साफ़-सफ़ाई एवं स्वच्छता की सुविधा उपलब्ध नहीं है उनमें से एक-तिहाई भारत में रहते हैं। इतना ही नहीं दुनिया में जिन अरबों लोगों के पास शौच के लिए शौचालय नहीं है और मजबूरन उन्हें खुले में शौच जाना पड़ता है। उसमें से 60 करोड़ लोग भारत के ही हैं। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि भारत में स्वच्छता के प्रति कितनी लापरवाही और अरुचि है। गाँधी जी ने अपने तमाम आश्रमों में सादगी और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा और आश्रम में रहने वाले हर व्यक्ति से दैनिक साफ़-सफ़ाई के कामों को स्वयं ही किया जाना अनिवार्य शर्त बनाया। उनका कहना था कि हर व्यक्ति को अपना मेहतर स्वयं बनना चाहिए तभी समाज से छूआ-छूत नाम की गन्दगी मिटेगी और हमारे गाँव शहर स्वच्छ व सुन्दर बनेंगे। भारतीय समाज में विषमता के कारण ही स्वच्छता एक चुनौती बनी हुई है। अच्छी सड़कें तो सभी चाहते हैं लेकिन उसकी साफ़-सफ़ाई का दायित्व कभी स्वयं पर नहीं डालना चाहते। सड़कों पर गंदगी करना जैसे हमारा पुनीत कर्तव्य बन गया है। इसी तरह छोटे मार्गों, गलियों, पार्कों, सार्वजनिक स्थानों और अन्य उपयोगी स्थानों को हम गंदा करके उसे साफ़ करना नहीं सीखा। यही कारण है कि शहरों में नई-नई बीमारियाँ रोज़ाना पैदा हो रही हैं। देशभर में प्लास्टिक कचरा आज एक बड़ी समस्या बन चुका है। प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग का इसी से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि पूरे विश्व में इतना प्लास्टिक हो गया है कि इस प्लास्टिक से पृथ्वी को 5 बार लपेटा जा सकता है। और इस प्लास्टिक का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा महासागरों में फैला हुआ है। प्लास्टिक का पृथ्वी पर रहने वाले सभी जीव जंतुओं के साथ-साथ अन्य जीवन के लिए ज़रूरी घटकों पर भी इसका बहुत ज़्यादा दुष्प्रभाव पड़ता है। प्लास्टिक एक धीमे ज़हर का काम कर रहा है यह मानव के जीवन में इस तरह से घुल चुका है कि मानव ना चाहते हुए भी इसका उपयोग कर रहा है। जय हिन्द!

तोता

आज हम सभी इस समारोह में हमारे पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम की वो शपथ दोहराएँगे जो उन्होंने अपनी किताब ’इंडिया विज़न 2020' में बताई है। मैं आदरणीय जिराफ जी से निवेदन करता हूँ कि वो हम सबको गाँधी जयंती के अवसर पर ये शपथ दिलाएँ।

जिराफ

आज महात्मा गाँधी जी की 150 वीं जयंती के शुभ अवसर पर हम सभी इन शपथ को दोहराकर अपने आचरण में उतारने की कोशिश करेंगे

 

(सभी जानवर शपथ को दोहराते हैं )

जिराफ

मैं पूर्ण निष्ठा से अपने कार्य को कुशलता पूर्वक सम्पन्न करूँगा। मैं कम से कम 10 पौधे लगाकर उनके वृक्ष बनने तक देखभाल करूँगा। मैं अपने आसपास के दस ऐसे लोग जो नशे का शिकार हैं उन्हें नशामुक्त करने में अपना सहयोग दूँगा। मैं अपने विकलांग साथियों की हर संभव सहायता करूँगा। मैं किसी धर्म, जाति, या भाषागत भेदभाव का समर्थन नहीं करूँगा। मैं एक प्रबुद्ध नागरिक बनने की दिशा में कार्य करूँगा एवं ईमानदारी से अपने काम का सफलता पूर्वक निर्वहन करूँगा। मैं अपने देश की गौरवपूर्ण सफलता पर उत्सव मनाऊँगा। जय हिन्द!

तोता

इस शपथ के बाद अब हम सभी आज इस समारोह के मुख्य उद्देश्य को पूरा करने के लिए एक शपथ और ले रहे हैं। यह शपथ हमें सुश्री कोयल देवी दिलवाएँगी, यह शपथ प्लास्टिक नकारने और स्वच्छता के लिए है।

कोयल

हम सभी जंगल के निवासी आज गाँधी जयंती पर यह शपथ लेते हैं कि हम बाज़ार से सामान पॉलिथीन में नहीं लायेंगे, न ही किसी भी कार्य में पॉलिथीन का उपयोग करेंगे। हम सभी अपने घर एवं आसपास के वातावरण को स्वच्छ बनायेंगे और कचरे को निर्धारित डस्टबिन में ही डालेंगे, हम सभी स्वयं के एवं अपने बच्चों के शरीर को स्वच्छ रखेंगे ताकि सभी बीमारियों का उन्मूलन कर सकें। हम सब गाँधी जी के सत्य, अहिंसा और स्वच्छता के आदर्शों का पालन करके भारत को एक समृद्ध और गौरवशाली देश बनाने में अपना सहयोग करेंगे। जय हिन्द!

 

(सभी लोग वन्देमातरम, गाँधी जी अमर रहें का उद्घोष करते हैं।)

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