पत्थर को ठिकाना मिला

15-10-2026

पत्थर को ठिकाना मिला

हेमन्त कुमार शर्मा (अंक: 302, अक्टूबर द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)


पत्थर को ठिकाना मिला, 
दीवार का फ़साना मिला। 
 
मैं पत्थर को गुनगुनाने लगा, 
कि पीड़ा का बयाना मिला। 
 
बारिश हुई चलते चलते, 
आँखों को भी बहाना मिला। 
 
भरोसा किया वादों पर, 
रास्ते में मयख़ाना मिला। 
 
रह गए अकेले दूर तक, 
ईमानदारी का हर्जाना मिला। 

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