एक शरारत से देखना उनका

01-03-2026

एक शरारत से देखना उनका

हेमन्त कुमार शर्मा (अंक: 293, मार्च प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

एक शरारत से देखना उनका, 
देखता रहा देखना उनका। 
 
तारों से लिपटा रहा देखना, 
क्या ग़ज़ब था टूटना उनका। 
 
देखो मोती धागे से माला थे, 
देखा खींचना बिखरना उनका। 
 
अपनी मिट्टी को परोलने आया, 
कुम्हार से सीखना उनका। 
 
ऊँचे ग़रीब आँगन में आ ही गए, 
देखता चारपाई रखना उनका। 

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