उसकी इसकी मिट्टी देखो तो

01-02-2026

उसकी इसकी मिट्टी देखो तो

हेमन्त कुमार शर्मा (अंक: 293, फरवरी प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

थोड़े बहुत जो ख़्वाब बचे हैं, 
यह भी तो रास्ते में सजे हैं। 
 
शायद गिनती में नहीं भगवन्, 
जैसे जितने तेरे नाम भजे हैं। 
 
उसकी इसकी मिट्टी देखो तो, 
सब के सब एक ही ने रचे हैं। 
 
सच खाता है धक्के क़दम क़दम, 
झूठ फ़रेब के तो कितने मज़े हैं। 
 
भीतर जाकर देखा जब भी, 
माया से भरपूर सजे हैं। 

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