गद्य में कविता कह रही है

15-04-2026

गद्य में कविता कह रही है

हेमन्त कुमार शर्मा (अंक: 295, अप्रैल द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

सतत् जवाब दे रही है, 
गद्य में कविता कह रही है। 
 
शब्दों की भरमार है, 
बड़ा सा आकार है। 
भाव बिना रह रही है, 
गद्य में कविता कह रही है। 
 
कबीर सा चुटिलापन, 
रैदास सा भक्तिपन। 
कहीं छोड़ ढह रही है, 
गद्य में कविता कह रही है। 
 
घनानंद का भाव कहाँ, 
निराला सी छाँव कहाँ। 
आविष्कारों को सह रही है, 
गद्य में कविता कह रही है। 
 
नागार्जुन के पैने वार, 
बिस्मिल देशभक्ति सार। 
उज्जवल पक्ष न कह रही है, 
गद्य में कविता कह रही है। 
 

0 टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

कविता
कविता - हाइकु
सजल
कहानी
लघुकथा
नज़्म
ग़ज़ल
हास्य-व्यंग्य आलेख-कहानी
सांस्कृतिक कथा
चिन्तन
ललित निबन्ध
विडियो
ऑडियो

विशेषांक में