कुछ गीत हमारे भी हैं

15-01-2026

कुछ गीत हमारे भी हैं

हेमन्त कुमार शर्मा (अंक: 292, जनवरी द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

कुछ गीत हमारे भी हैं, 
कुछ ज़ख़्म तुम्हारे भी हैं। 
 
कुछ हँसी के मोती, 
कुछ आँसू खारे भी हैं। 
 
जगमग करते तारे भी हैं, 
कुछ क़िस्मत के मारे भी हैं। 
 
आते हो देर से कभी कभी, 
कुछ आते कुछ लारे भी हैं। 
 
कुछ बातें भीतर घुट गई हैं, 
कुछ दबी दबी पुकारें भी हैं। 

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