मेरे आईने में तस्वीर हो तुम

01-03-2025

मेरे आईने में तस्वीर हो तुम

हेमन्त कुमार शर्मा (अंक: 272, मार्च प्रथम, 2025 में प्रकाशित)

 

मेरे आईने में तस्वीर हो तुम, 
जग से जोड़ी हुई ज़ंजीर हो तुम। 
 
शुरूआत मुझसे हुई हो चाहे फिर, 
मसला यह है कि आख़िर हो तुम। 
 
चाहे निशाने पर नहीं हो तुम, 
फिर भी समझो तीर हो तुम। 
 
बेक़रारी यों ही तो नहीं होती, 
दिल में लिए बैठे मीर हो तुम। 
 
तुम तुम से अलहदा हो दोस्त, 
यह न सोचो कि शरीर हो तुम। 

0 टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

सजल
कहानी
कविता
नज़्म
ग़ज़ल
लघुकथा
हास्य-व्यंग्य आलेख-कहानी
सांस्कृतिक कथा
चिन्तन
ललित निबन्ध
विडियो
ऑडियो

विशेषांक में