अपने आप से घबरा गया हूँ

15-07-2026

अपने आप से घबरा गया हूँ

हेमन्त कुमार शर्मा (अंक: 301, जुलाई द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

अपने आप से घबरा गया हूँ, 
छाया से धूप में आ गया हूँ। 
 
मेरे अपने से कुछ सवाल थे, 
जैसे अँधेरे में मशाल थे। 
दूजों से बच चलता रहा, 
बस अपनों से गच्चा खा गया हूँ, 
छाया से धूप में आ गया हूँ। 
 
और एक क़िस्सा तमाम किया, 
आँखों को आँसुओं का जाम दिया। 
सहते सहते जीवन को, 
आख़िर में चिल्ला गया हूँ, 
छाया से धूप में आ गया हूँ। 
 
अपने आप से घबरा गया हूँ, 
छाया से धूप में आ गया हूँ। 

0 टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

सजल
कविता
लघुकथा
कहानी
कविता - हाइकु
नज़्म
ग़ज़ल
हास्य-व्यंग्य आलेख-कहानी
सांस्कृतिक कथा
चिन्तन
ललित निबन्ध
विडियो
ऑडियो

विशेषांक में