उठ चुकी हूँ नींद से 

15-12-2025

उठ चुकी हूँ नींद से 

हेमन्त कुमार शर्मा (अंक: 290, दिसंबर द्वितीय, 2025 में प्रकाशित)

मैं चलती हूँ, 
मेरी परछाईं भी 
 साथ चलती है। 
 
मैं पीपल की तरह, 
कहीं भी उगती हूँ। 
 
मैं नाचूँ तो
हृदय भी नाच उठता है, 
भावनाएँ प्रफुल्लित हो
आँखों से बहने लगती हैं। 

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