चलें फिर ग़म को भुलाने

15-04-2026

चलें फिर ग़म को भुलाने

हेमन्त कुमार शर्मा (अंक: 295, अप्रैल द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

चलें फिर ग़म को भुलाने, 
याद करते हैं फिर पैमाने। 
 
नश्तर थे लफ़्ज़ कहाँ थे, 
इससे अच्छे थे बेगाने। 
 
सुमन तुम ग़ायब कुछ दिन, 
कितने पड़े रहे यूँ फसाने। 
 
छूट गए राह में कई हसीं मंज़र, 
याद करके बैठे दिल दुखाने। 
 
लुट गया आगे की सोच में, 
ख़र्च हुए क्षण अतीत बताने। 

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