कि दिन न था रात न थी

15-05-2026

कि दिन न था रात न थी

हेमन्त कुमार शर्मा (अंक: 297, मई द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

यहाँ आयु की बात न थी, 
कि दिन न था रात न थी। 
 
बस ख़र्चे चल जाते हैं, 
पैसों की बरसात न थी। 
 
निकले हैं घर से आँधी में, 
आधे रास्ते बरसात न थी। 
 
कोयल दूर कहीं गाती है, 
मन की कोमल गात न थी। 
 
वर्षों का एक सपना टूटा, 
हृदय को अब मात मात न थी। 

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