अब घिर आए सावन भी

01-02-2026

अब घिर आए सावन भी

हेमन्त कुमार शर्मा (अंक: 293, फरवरी प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

अब घिर आए सावन भी, 
हृदय पर बादल घिर आए। 
 
मन क्यों चिन्ता में रहता है, 
अन्दर अन्दर ही सहता है। 
ओस पत्तों पर स्थिर आए, 
हृदय पर बादल घिर आए। 
 
वन में छुपे रहते हैं कुछ पौधे, 
कुछ फूल पैरों से होते रौंधे। 
दुनिया देखन औंधे सिर आए, 
हृदय पर बादल घिर आए।

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