वन के अपथ पथ न पूछो

15-01-2026

वन के अपथ पथ न पूछो

हेमन्त कुमार शर्मा (अंक: 292, जनवरी द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

वन के अपथ पथ न पूछो। 

दूर कहीं कुसुम खिला हो, 
मरु में जैसे पानी मिला हो। 
चुनाव समय मत न पूछो, 
वन के अपथ पथ न पूछो। 
 
पशु पक्षियों का तीरथ है, 
वन ओषजन की मूरत है। 
शब्दों में संगत न पूछो, 
वन के अपथ पथ न पूछो। 
 
हार की गणित नहीं सुलझेगी, 
जीत से कड़ी और उलझेगी। 
बिना अश्व चलता रथ न पूछो, 
वन के अपथ पथ न पूछो। 
 
यह जीवन जैसा भी पाया, 
कठिन धुँध को धूप ने खाया। 
रखे अधूरे ख़त न पूछो, 
वन के अपथ पथ न पूछो। 

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