अगर ज़िन्दगी का

01-06-2026

अगर ज़िन्दगी का

हेमन्त कुमार शर्मा (अंक: 298, जून प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

अगर ज़िन्दगी का मतलब बता दे, 
हर एक ग़म फिर चाहे मुस्कुरा दे। 
 
ढल जाने वाली है ग़म की शाम, 
सुबहे होगी रात को बता दे। 
 
बोलने क्या है चुप ही सलाह है, 
पिय के मिलन पे घूँघट हटा दे। 
 
राहज़न थे निकले रहबर सारे, 
प्रभु को अपना रहबर बना ले। 
 
अदा की है मारी यह सारी दुनिया, 
पलकों को उठा के ज़रा सा झुका ले।

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