बेक़रारी है बहुत

01-06-2026

बेक़रारी है बहुत

हेमन्त कुमार शर्मा (अंक: 298, जून प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

ख़्वाब ठिकाने लगाए हैं, 
तब जी पाए हैं। 
 
साँस जब उखड़ने लगे, 
मंज़िल के पयाम आए हैं। 
 
ढोल नगाड़े गूँज उठे, 
फिर हार आए हैं। 
 
बेक़रारी है बहुत, 
दोस्तों से फ़रेब खाए हैं। 
 
आ चलें गंगा घाट, 
ग्रीष्म ने गीत गाये हैं। 

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