दुख के पारावार में

15-03-2026

दुख के पारावार में

हेमन्त कुमार शर्मा (अंक: 294, अप्रैल प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

दुख के पारावार में, 
सुख की कल्पना गूँथता। 
 
गहरी अन्तर वेदना ले कर, 
अधरों पर मुस्कान फेंक कर। 
अपने आप को लूटता, 
 
दुख के पारावार में, 
सुख की कल्पना गूँथता। 
 
लकीरें आड़ी तिरछी थीं, 
आत्मकथा
विरह की बरछी थी। 
सपनों का गला घूँटता। 
 
दुख के पारावार में, 
सुख की कल्पना गूँथता। 

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