शख़्स

राजीव डोगरा ’विमल’ (अंक: 301, सितम्बर प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

एक शख़्स है 
जो तुम्हारे इंतज़ार में बैठा है
मोहब्बत न सही
दोस्ती के इज़हार में बैठा है। 
 
एक शख़्स है 
जो सुनता नहीं 
कभी किसी की भी 
मगर तुम्हारी हर बात 
सुनने के इंतज़ार में बैठा है। 
 
एक शख़्स है 
जो सोचता नहीं 
कभी किसी का भी 
वो हर जगह हर लम्हा 
तेरा एहसास लेकर बैठा है।

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