याराना

राजीव डोगरा ’विमल’ (अंक: 298, जून प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

हर लम्हा सुहाना होगा 
तेरा हंँसना और फिर 
देखकर तुम्हें 
मेरा मुस्कुराना होगा। 
 
माना कि हम कुछ भी नहीं 
मगर तुम्हारे सिर के ताज पर
हर पल हमारा पहरा होगा। 
 
मैं हार भी जाऊँ 
तुम्हें जीतने के लिए 
तो भी तेरे सपनों में
एक अफ़साना होगा। 
 
एक तलब है तुम्हें हर पल 
मुस्कुराते देखने की
अगर मैं मिट भी जाऊँ 
तो भी ये मेरा याराना होगा। 

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