रवायत 

01-05-2026

रवायत 

राजीव डोगरा ’विमल’ (अंक: 296, मई प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

हमें यूँ तुमको 
देखने की आदत है। 
न है मोहब्बत 
फिर भी बहुत कुछ 
कहने की आदत है। 
 
कभी सोचा ही नहीं 
तुमको पाने का 
बस यूँ ही तुमसे
दिल लगाने की आदत है। 
 
लोग सोचते हैं 
जिस्म को छूने की 
हमें यूँ ही 
तुम्हारी रूह को 
गले लगाने की आदत है। 

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