अधूरे जज़्बात

15-06-2026

अधूरे जज़्बात

राजीव डोगरा ’विमल’ (अंक: 299, जून द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

मैं मंदिर गया
मैं मस्जिद गया
मेरी रगों में 
मोहब्बत का गीत
फिर भी
ज़र्रे-ज़र्रे में
बहता गया। 
 
इश्क़-विश्क
थोड़ा-थोड़ा
हम भी
किसी न किसी से
करते रहे
इसीलिए ग़मों का
बोझ उठाए फिरते रहें। 
 
कभी किसी को
समझाया
मान अपना
कभी ख़ुद को
समझाया
हमदर्द
मान अपना।

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