अनकहा इश्क़

01-02-2026

अनकहा इश्क़

राजीव डोगरा ’विमल’ (अंक: 293, फरवरी प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

मैं जानती हूँ 
तुम सब जानते हो
फिर ये भ्रम की माया
क्यों नहीं पहचानते हो? 
 
जानते हो तुम मेरी 
मुस्कुराहट की वजह 
फिर मुस्कुरा औरों से 
मेरे सीने को क्यों छलनी करते हो। 
 
मैं जानती हूँ 
तुम मेरी फ़िक्र बहुत करते हो 
छू न जाए हवा भी मुझे 
इस बात से भी डरते हो। 
 
सुना है तुम जीत लेते हो
सब का हृदय 
फिर मेरी एक मुस्कुराहट के आगे 
क्यों ख़ुद को हारे हुए बैठे हो? 
  
लिखते हो तुम 
अपनी ग़ज़लों में मेरे बारे में
फिर मेरा नाम 
सरेआम लेने से क्यों डरते हो। 

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