इंतज़ार

राजीव डोगरा ’विमल’ (अंक: 292, जनवरी द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

इंतज़ार है जब कोई 
अपनी ख़ुशी से हमसे बात करें। 
  
इंतज़ार है जब कोई 
समझे हम इतने बुरे भी नहीं है। 
 
इंतज़ार है जब कोई 
समझे साथ खड़ा व्यक्ति 
मानव नहीं महामानव है। 
 
इंतज़ार है जब कोई 
समझे हम उनको जीवन का 
हर मुक़ाम फतेह करते देखना चाहते हैं। 
 
इंतज़ार है जब कोई 
समझे आध्यात्मिक लोग ऐसे ही 
किसी के जीवन में नहीं चले आते। 
 
इंतज़ार है जब कोई 
समझे कि मैं आया हूँ 
उसके जीवन को एक दिशा देने। 

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