ओलम (अनन्त प्रेम) 

01-09-2026

ओलम (अनन्त प्रेम) 

राजीव डोगरा ’विमल’ (अंक: 301, सितम्बर प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

जी रहा हूँ जीवन 
बड़ी ही शिद्दत से
क्या मेरी पीड़ा का 
कारण बन तुम 
मुझे शून्य करोगे? 
  
हारा तो कभी 
था ही नहीं मैं 
पर क्या छेड़
मेरे जज़्बातों की तरंगों को 
मुझे तुम अधूरा करोगे? 
  
मानता हूँ तुम्हें 
भेजा है उस ख़ुदा ने 
स्वयं मेरे पास
क्या छेड़ प्रेम का राग 
मुझे हीरा करोगे?

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