दर्द मिटा दूँगा

01-05-2026

दर्द मिटा दूँगा

राजीव डोगरा ’विमल’ (अंक: 296, मई प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

तेरे दर्द को अल्फ़ाज़ दूँगा
मत सोच तू अकेला है
हर क़दम पर तेरा साथ दूँगा। 
 
दर्द का समुंदर जो तेरे अंदर
नित्य रफ़्ता रफ़्ता बहता है 
उसको भी एक दिन किनारा दूँगा। 
 
जिस ख़ामोशी में समा रखा है 
छटपटाता तूने दर्द अपना
उसको भी एक दिन आवाज़ दूँगा। 
 
एक शमा जो तूने रौशन रखी है 
ख़ुद को ही मर मिटाने को
बुझा उसको एक दिन तुम्हें
अपने गले लगा लूँगा। 
 
जो अश्क बहाते हो तुम 
चोरी-चोरी बैठे किसी कोने में 
उनको पोंछकर तेरे चेहरे पर 
जादू सी मुसकुराहट ला दूँगा। 

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