वफ़ा 

राजीव डोगरा ’विमल’ (अंक: 294, मार्च द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

फैला दो हवाओं में 
पैग़ाम मेरा 
कि हम तेरे शहर में 
वफ़ा बाँटने आये हैं। 
 
लेकर ग़म तेरे
नसीब में अपने, 
तेरा नाम अपनी 
तक़दीर लिखने आये हैं। 
 
वो जो कहते हैं लोगों से 
कुछ भी न मिलता 
यूँ सोचने से 
उनको कह दो 
हम उनको अपने 
नसीब में लिखने आए हैं। 

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