सवेरा

राजीव डोगरा ’विमल’ (अंक: 231, जून द्वितीय, 2023 में प्रकाशित)

 

हुआ सवेरा एक है
मिटा अँधेरा अनेक है, 
जीवन की लालिमा छाई
बुराई की कालिमा भगाई, 
नन्हे मुन्ने फूलों ने
सुबह ही रौनक़ लगाई, 
पंछियों के चहचहाहट ने
हर बुरी नज़र भगाई, 
नील गगन में उड़ती
रंग बिरंगी चिड़ियों ने
सबके चेहरे पर
सुबह ही मुस्कुराहट लाई। 

0 टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

कविता
नज़्म
बाल साहित्य कविता
सामाजिक आलेख
विडियो
ऑडियो

विशेषांक में